देवानंद बोयपई: आदिवासी शब्द को तोड़कर देखें तो, आदि+वासी – यानि जल जंगल और ज़मीन पर आदि काल से निवास… READ MORE
पतिचरण मुर्मू: आदिवासी संताड़ सामाज कहानी।आबो संताड़ को ताहेंकाना राजा, रानी ।।ताहेंकाना को किसकू समाज।दिशोमरे ताहेंकाना अनकुवाः राज।।ताहेंकाना आबोवाः चाईगाड़।ताहेंकाना… READ MORE
सलोमी एक्का: मुंडा (या मुण्डा) जनजाति मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, बंगाल, और अंडमान में निवास करती… READ MORE
एडविन टोप्पो: मैं झारखंड के गुमला ज़िले के पुटरुंगी गाँव के एक मध्यवर्गीय परिवार से आता हूँ। मुझे पढ़ने का… READ MORE
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गोपाल लोधियाल : उत्तराखंड के चमोली जिले में जहाँ से अलकनंदा बह रही है, इसके सिरहाने पर बसे हुए हेलंग… READ MORE
अभिषेक जमरे: आज मैं अपने गाँव की वड़ फलिया में गया। पिछले कुछ महीनों से मैं इस फलिया में बच्चों… READ MORE
अमित: ये कहानियाँ 1997 में पश्चिम चंपारण ज़िले में गाँव की मीटिंग में सुनीं थीं। स्कूल के कमरे में एक… READ MORE
युवानिया डेस्क: सोहराय पर्वसे संथाल आदिवासियों का एक प्रमुख पर्व है। इस पर्व को मनाने का मुख्य कारण धान पकाने… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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