जंग हिंदुस्तानी: कतरनिया घाट में जंगल की सैर करने के लिए पालतू हथिनी सीताकली और चंपाकली एक साथ जाया करती… READ MORE
जंग हिन्दुस्तानी: शिवालिक की हरी-भरी पहाड़ियों से घिरे जंगल में सदियों से रहने वाले वन गुज्जर परिवारों के बच्चे किताबों… READ MORE
राकेश जाधव: लिखते-लिखते कोरे कागज ख़त्म हो गए थे, मैंने फ़टाफ़ट अपने ढीले कपड़े खूंटी पर लटकाए और झोला उठाकर… READ MORE
शैलेश, रिंपी: कार्य के दौरान लोगों को जानने और समझने की प्रक्रिया में जुड़ते हुए, मैंने जंगी हिंदुस्तानी का नाम… READ MORE
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विनीत काण्डपाल : सत्यनारायण व्यास जी की आत्मकथा ‘क्या कहूं आज’ उनके संघर्ष की कथा है। ऐसा अनवरत संघर्ष जिसने… READ MORE
जंग हिन्दुस्तानी : जाड़े की सुबह थी। हल्की-हल्की धूप खिली हुई थी। जंगल के बीच मौजूद घास के मैदान में… READ MORE
सिम्मी : अगर सिनेमा की बात की जाए तो यह सिर्फ मनोरंजन का एक साधन है। जिसको देखने भर से… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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