जंग हिन्दुस्तानी : 

जाड़े की सुबह थी। हल्की-हल्की धूप खिली हुई थी। जंगल के बीच मौजूद घास के मैदान में बंदरों का पूरा समूह उछल-कूद कर रहा था। बंदरों के बच्चे आपस में कलाबाजी कर रहे थे। एक-दूसरे को दौड़ाते हुए कबड्डी कर रहे थे। उन बच्चों के माता-पिता घास की जड़ों को निकाल कर दांतों से इस तरह से काट रहे थे जैसे लग रहा था कि दातुन कर रहे हों।

पूरे मैदान में सिर्फ एक रोहिणी का पेड़ था, जो इतना घना था कि उसमें छुप कर बैठा हुआ तेंदुआ उन बंदरों को दिखाई नहीं पड़ रहा था। तेंदुआ ताक में था कि इनमें से किसको अपना शिकार बनाए। बड़े बंदरों का झुंड उससे लगभग 100 मीटर की दूरी पर था। बंदरों के छोटे-छोटे बच्चे खेल-कूद करते हुए उस पेड़ की तरफ बढ़ रहे थे। 

कहीं से उड़ता हुआ एक कौवा उस पेड़ के पास आकर डाल पर बैठा लेकिन तेंदुए को देखकर तुरंत ही कांव-कांव करते हुए उड़ चला। उसकी आवाज़ से थोड़ी देर के लिए बंदरों का समूह चौकन्ना हुआ, लेकिन फिर अपने काम पर लग गया। अब बंदर के एक छोटे बच्चे ने समूह से अलग होते हुए पेड़ की तरफ दौड़ लगाई।  

उस बच्चे की माँ ने उसे ऐसा करते हुए देखा तो वह भी उसके पीछे दौड़ने लगी। तेंदुआ को लगा कि यही अच्छा मौका है और वह पेड़ से कूद कर बच्चे की तरफ दौड़ पड़ा। उस बच्चे की माँ ने छलांग मार करके बच्चे को सीने से चिपका लिया और तेंदुए से बचा लिया, लेकिन खुद वह तेंदुए के चक्कर से बच नहीं सकी। तेंदुए ने उसकी पीठ को मुँह में दबा दिया और लेकर चल दिया। बच्चा अपनी माँ के सीने से चिपका रहा। 

“माँ ने बार-बार कहा ” भाग जा बेटा। अपनी जान बचा ले वरना मेरे साथ तू भी मारा जाएगा।

बच्चे ने रोते हुए कहा- “नहीं, आपने अपनी जान जोखिम में डाल करके मुझे बचाया है तो मैं कैसे आपको इस हालत में छोड़ दूँ। मेरी तो जान जा चुकी थी लेकिन आपने जो जान बचाई है उसे अब आपके साथ ही मुझे नष्ट कर देना है। आखिर यह शरीर आपका ही दिया हुआ है। मैं आपका साथ छोड़ दूंगा तो लोग कहेंगे कि बंदर भी इंसान की तरह हो गया और बंदर व इंसान में क्या अंतर रह गया? माँ! मैं इंसान नहीं हूँ कि दुःख में अपनी माँ को छोड़ दूँ। मैं आपको बचाने का हर संभव प्रयास करूँगा। नहीं बचा पाया तो अपनी जान दे दूंगा, लेकिन आपका साथ नहीं छोडूंगा।” बच्चे ने जोर-जोर से आवाज़ लगाई तो बंदरों का सारा समूह तेंदुए की तरफ दौड़ पड़ा। बंदर के बच्चे ने तेंदुए की खोपड़ी पर बैठकर दोनों हाथों से उसकी आँख बंद कर दी।

अब तेंदुआ चारों तरफ से घिर चुका था और सारे बंदर मिलकर उसे नोच रहे थे। अंततः उसे मादा बंदर को छोड़ना ही पड़ा।

यद्यपि तेंदुए की पकड़ से उस मादा बंदर की जान निकल चुकी थी लेकिन पूरे समूह को उस नन्हे से बच्चे के मातृ प्रेम पर गर्व महसूस हो रहा था। बच्चा अब भी माँ के पेट से चिपका हुआ था। समूह के साथियों ने उस मादा बंदर को अंतिम विदाई दी और उस बच्चे को अपने साथ लेकर जंगल की ओर चले गए।

(कहानी काल्पनिक है)

फीचर्ड फोटो आभार – गूगल https://www.dailymail.co.uk/news/article-10115431/Baby-monkey-clings-dead-mother-leopard-clamps-lifeless-body-jaws.html

Author

Leave a Reply

Designed with WordPress

Discover more from युवानिया ~ YUVANIYA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading