गोपाल पटेल: इस दुनिया में रिश्ते बनाना आसान है, लेकिन रिश्तों को निभाना बहुत कठिन है। जो इसकी अहमियत जानता… READ MORE
गोपाल पटेल: मैं वृक्ष हूँ, इस माटी का x2जो मुझे सींच कर रखती है।मैं वृक्ष हूँ इस माटी का जो मुझे… READ MORE
पावनी: छूना है आसमान, उन उड़ते परिंदों की तरह,मुझे भी एक दिन..। उन छोटी-बड़ी मछलियों की तरह,देखनी है सागर की गहराइयाँ,मुझे… READ MORE
अजय कन्नौजे: प्रकृति से ही लिया है, तो उसे लौटाना पड़ेगा, प्रकृति से ही जीवन है, तो उसे मनाना पड़ेगा।… READ MORE
आलोक सोनकर: मैं रात के अंधेरे में जब भी छत की तरफ देखता हूं, तो कुछ अपूर्ण सपने मेरे सामने… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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