जिनित सामाद: मई दिवस का इतिहास खून-पसीने की स्याही से लिखा गया है। आज जब हम आधुनिक भारत की बात… READ MORE
नम्रता मिश्रा: शहरों के कई इलाकों में सुबह-सुबह कपड़ों के बड़े-बड़े ढेर दिखाई देते हैं। इन ढेरों में से इस्तेमाल… READ MORE
जीनित सामाद: भारत का ग्रामीण समाज लंबे समय से आजीविका, पलायन और असुरक्षा के त्रिकोण में फंसा रहा है। ऐसे… READ MORE
ज्ञानेन्द्र अवस्थी: निक हनौएर कोई वामपंथी प्रोफेसर नहीं हैं।वह किसी एनजीओ से पेट नहीं भरते।वह अमेरिका के शीर्ष 0.01% अमीरों… READ MORE
नम्रता मिश्रा : इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय मज़दूर दिवस के 103 साल पूरे हो रहे हैं। भारत में पहली बार यह… READ MORE
सुधीर कटियार: संगठन का काम करने के लिए खेमराज ने अपनी ज़िंदगी में बहुत से अड्डे जमाये। खेमराज खुद, उसके… READ MORE
कमलचंद : भारत की आबादी का बहुत बड़ा हिस्सा मेहनतकशों का है, लेकिन यह विशाल आबादी ही इस देश की… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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