उर्मिला:

9 मार्च 2026 को गामडी आहड़ा (नया ब्लॉक, डूंगरपुर) में राजस्थान असंगठित मज़दूर यूनियन के साथियों ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस उत्साह के साथ मनाया। इस कार्यक्रम में गीत, खेल और नाटक के माध्यम से महिलाओं के संघर्ष और उनकी उपलब्धियों को याद किया गया।

कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि महिलाएँ समाज और परिवार में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे घर का काम करती हैं, बच्चों की देखभाल करती हैं, पशुओं की देखभाल करती हैं और खेतों में भी मेहनत करती हैं। इन सभी कामों का सम्मान होना चाहिए, क्योंकि ये भी महत्वपूर्ण काम हैं।

कार्यक्रम में महिलाओं के अधिकारों के बारे में भी चर्चा की गई, जैसे:

  • शिक्षा का अधिकार
  • समान वेतन की मांग, खासकर नरेगा जैसी योजनाओं में
  • ज़मीन और संपत्ति में महिलाओं का नाम दर्ज करवाना
  • स्वास्थ्य और जैविक खेती के बारे में जागरूकता

कार्यक्रम में आए अतिथियों ने अपने अनुभव साझा किए। रमीला जी द्वारा बताया गया कि वे बिना यूरिया और रासायनिक दवाइयों के केवल देसी खाद और देसी बीज से खेती करती हैं। इससे उगाया गया अनाज स्वादिष्ट और पौष्टिक होता है। पहले के समय में लोग ज्वार, बाजरा, काहली और हामली जैसे देसी अनाज खाते थे, इसलिए लोग कम बीमार पड़ते थे। डॉ. प्रफुल बाला ने महिलाओं को स्वास्थ्य के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि रोज के भोजन का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, क्योंकि अधिक काम करने से महिलाओं में कमजोरी और खून की कमी हो जाती है। डॉ. आजेश जी ने भी बताया कि यदि किसी को दम, बुखार या अन्य स्वास्थ्य समस्या हो, तो वे उनसे संपर्क कर सकते हैं।

कार्यक्रम में पर्यावरण और प्लास्टिक के उपयोग पर भी बात हुई। एक छोटी बच्ची कृष्णा ने सभी को बताया कि नदियों और तालाबों में कचरा नहीं फेंकना चाहिए। कचरे को इकट्ठा करके सही जगह पर डालना चाहिए। प्लास्टिक का उपयोग कम करना चाहिए, क्योंकि यह जमीन में जाने के बाद कई बीमारियों का कारण बन सकता है।

इस कार्यक्रम से महिलाओं को कई अच्छी बातें सीखने को मिलीं:

  • घर का काम भी एक महत्वपूर्ण काम है और इसका सम्मान होना चाहिए।
  • बच्चों की देखभाल, पशुपालन और खेती भी महत्वपूर्ण काम हैं।
  • अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और पौष्टिक भोजन खाएँ।
  • जैविक और देसी तरीके से उगाई गई सब्जियों और अनाजों का उपयोग करें।
  • नरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं में अपने अधिकारों का पूरा लाभ लें।

इस तरह यह कार्यक्रम महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ स्वास्थ्य, पोषण और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देता है।

मैं महिलाओं के प्रति यही सोचती हूँ कि महिला और पुरुष को समान/बराबर समझा जाए और उनके हर काम का सम्मान मिले। किसी प्रकार का भेदभाव न हो। महिलाओं को भी पुरुष जितनी इज्जत मिले! यह प्रेरणा मुझे सामाजिक परिवर्तन शाला और अलग-अलग ट्रेनिंग में जाने से मिली है।

Author

  • उर्मिला शारदा फनात / Urmila Sharda Fanat

    उर्मिला शारदा फनात, डूंगरपुर ज़िले के बिछीवाड़ा ब्लॉक के मालमाथा गाँव में रहती हैं। उर्मिला, राजस्थान असंगठित मजदूर यूनियन की सक्रिय कार्यकर्ता हैं और अपने क्षेत्र की महिलाओं के अधिकार, मनरेगा और मज़दूर मुद्दों पर काम करती हैं।

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