मंजूलता मिरी: ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में महिलाओं के पास भूमि स्वामित्व न होना उनकी सबसे बड़ी असुरक्षा रही है।… READ MORE
अफ़ाक : जंगल और पहाड़ हमको हमेशा अपनी ओर खींचते रहे हैं। बतौर पर्यटक हम बाहरी सुंदरता देखते-समझते हैं। दो-चार… READ MORE
कोर्दूला कुजूर: नगेसिया समुदाय का मुख्य बसाहट अधिकतर पहाड़ों के ऊपर याने पठारी भाग में है। भौगोलिक दृष्टिकोण से देखा… READ MORE
नरेश कुमार बेसरा: आओ मेरे गाँव मेंकभी समय निकाल करइमली पेड़ के छांव मेंबैठ कर बात करेंगे। घर में मिट्टी… READ MORE
ଜାକିଣ୍ଟା କେର୍କେଟା : ମା!ତୁ ଏମିତି ରାତିସାରାକାହିଁକି ଅପେକ୍ଷା କରୁଛୁ?ମହୁଲ ଫୁଲ ଗୁଡ଼ିକ ତଳେପଡ଼ିଲା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ!ଗଛରୁ ଛିଣ୍ଡାଇ ଆଣି ଦେଉନୁ! ପ୍ରଶ୍ନ ଶୁଣି ମା କହେ,ଇଏ ରାତି… READ MORE
मो नसीम / आफाक: अप्रैल के महीने में महुआ चुना (गिरना) शुरू हो जाता हैं। जब महुआ पेड़ पर आता… READ MORE
देवानंद बोयपई: आदिवासी शब्द को तोड़कर देखें तो, आदि+वासी – यानि जल जंगल और ज़मीन पर आदि काल से निवास… READ MORE
नाव: मनीषा मनोज शहारे मुक्काम: कन्हांळगाव | पोस्ट: राजोली | तहसील: अर्जुनी/मोरगाव | जिल्हा: गोंदिया( महाराष्ट्र राज्य) शिक्षण: बीए पार्ट 2… READ MORE
ଲୋଚନ ବରିହା (लोचन बरिहा): ଜଲ ଜଂଗଲ ଜମୀନ୍ ମାଁ ବୁଆ ରେ ଆମେ ଇ ମାଟିର ଛୁଆ ଜଂଗଲ ହେଉଛେ ଆମ୍ କେ ସାହାରେ ଆମେ… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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