झारखण्ड के 21 साल- क्या बिरसा का सपना पूरा हो पाया ?

शशांक शेखर: आज धरती आबा बिरसा मुंडा की जयन्ती है और झारखण्ड स्थापना दिवस भी। झारखंड राज्य गठन हुए पूरे 21 साल हो गए। केंद्र

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हम गरीब कैसे बने – 2 : “घर बखर सब आपका लेकिन डेहरी के अंदर पांव मत रखना!”

आदिवासियों से ज़मीन छिनने की कहानी अमित: मध्य प्रदेश के सतना ज़िले के श्री साधूराम से सुनकर अमित ने लिखी यह कहानी सतना ज़िले के

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विदर्भ के गोसेखुर्द बाँध विस्थापितों के पुनर्वास और जातिभेद पर जीत की कहानी

विलास भोंगाड़े: साल 1983 में दांडेकर कमिटी ने महाराष्ट्र राज्य के विदर्भ इलाके के पिछड़ेपन के कारणों पर एक रिपोर्ट पेश की थी, उसे विदर्भ

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सहअस्तित्व पर आधारित है गोंड समुदाय की ‘साझा’ व्यवस्था

अनुज बेसरा: आदिवासी समुदाय हमेशा से ही सहअस्तित्व पर विश्वास करते हुए और उसे जीते आए हैं। वह प्रकृति हो या प्राणिजगत, वह सबसे उतना

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खेती के प्रति युवाओं की सोच

दीवान डुडवे:  हमारा देश कृषि प्रधान है और कृषि हम भारतीयों के लिए रोज़गार का सबसे बड़ा साधन है। मौजूदा दौर में युवा शिक्षित हो

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आदिवासी और जंगल की अर्थ व्यवस्था से दूर क्यूँ हैं शिक्षा के सिलेबस?

आमिर जलाल: हर समाज की अपनी एक अलग पहचान होती है। वो चाहे शहर हो, गाँव हो या जंगल हो। इंसान का बसेरा हर जगह

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