सिम्मी:
पृष्ठभूमि: ग्रामीण महिला उद्यमी सहर कार्यक्रम महिलाओं को अपनी आकांक्षाओं को जानने, समझने और उस तक पहुँचने का पहला कदम है। इस एक कदम को लेने के विषय में सोचना भी नहीं हो पाता है, क्योंकि जिस तरह का हमारा समाज है, वहाँ किसी महिला का अपना कोई सपना होता है, यह बात सहज नहीं है। महिला अपना कोई सपना देखे और बाहर निकलकर अपने सपनों को पूरा करने की पहल ले। इसके लिए यह फेलोशिप आरंभिक स्पेस बना रही है। हमारी कोशिश है कि हम ग्रामीण समाज में उन महिलाओं तक अपनी पहुँच बनाएँ, जिन तक कोई पहुँच नहीं रहा है। यह महिलाओं को पहली शुरुआत करने, दुबारा से शुरू करने, पढ़ने, सीखने, समझने के लिए अवसर देता है। इस फेलोशिप के लिए कोई विशेष कौशल, ज्ञान और अनुभव की ज़रूरत नहीं है। बस एक चीज़ की ज़रूरत है, वह यह कि खुद से अपने लिए कुछ करने की चाह हो, इस चाह में उनके जैसी अन्य महिलाओं को भी शामिल करें। यह महिलाएँ साथ मिलकर साझे सपने बुनें और अपने साझे सपनों को साकार करने में एक-दूसरे का सहयोग करें।
हमारी इस पूरी प्रक्रिया में साथ आने, सोचने और सामूहिक कोशिश करने की अपील है, जो ग्रामीण समाज में महिलाओं की अगुवाई में नवीन ज्ञान और कौशल विकसित कर रही है।
फेलोशिप में क्या हुआ है
हमने उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र में ग्रामीण महिला उद्यमी कार्यक्रम की शुरुआत साल 2020 में की। सहर फेलोशिप के प्रचार-प्रसार के लिए, जो आज के दौर के माध्यम हैं, उनका प्रयोग न करते हुए स्थानीय समाचार पत्र जनमोर्चा में सूचना दी गई। मसौधा ब्लॉक, पंचायत भवन आदि जगहों पर पोस्टर लगाए गए। एकता बुक स्टॉल मकबरा, प्रेम बुक डिपो चौक और शानू साइबर कैफे में फॉर्म रखा गया। हमारे पहले बैच की फेलोशिप के लिए 29 फॉर्म महिलाओं के आए। 15 महिलाओं के साथ अभिमुखीकरण कार्यशाला की गई और पहले बैच के लिए पाँच महिलाओं का चयन हुआ। हमारे लिए फेलोशिप संचालन का यह पहला अवसर था, जो हमको खुद कदम-कदम पर सीखने का अवसर था।
आवेदन प्रक्रिया में आवेदन करने वाले को खुद लिखना होता है। हम खुद से लिखने वालों को ही इस प्रक्रिया का हिस्सा बनाते हैं। हमने पिछले बैचों के फेलो से बातचीत करते हुए पाया कि अधिकांश महिलाओं ने, जिन्होंने फेलोशिप के लिए आवेदन किया था, उन्होंने अपनी थोड़ी-बहुत लिखाई-पढ़ाई के बाद पहला ही कोई आवेदन फॉर्म खुद से भरा है। आवेदन फॉर्म भरने से ही उनकी खुद के बारे में सोचने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। जो आवेदन हमको बेहतर लगता है, उनके साथ फोन कॉल पर बात की जाती है। उसमें जो प्रतिभागी बाहर निकलकर कुछ करने, जानने, समझने और सीखने के लिए इच्छुक होते हैं, उनको तीन दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला के आयोजन में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
हमारे और प्रतिभागियों के लिए यह तीन दिवसीय अभिमुखीकरण कार्यशाला बहुत महत्वपूर्ण होती है। जो हमारा कार्यशाला का मॉड्यूल है, वह किसी भी व्यक्ति को अपने बारे में ठहरकर सोचने, अपनी ताकत, कमज़ोरी आदि को जानने और खुद से क्या-क्या कर सकती हैं, उसकी स्वयं से पड़ताल करने में बहुत सहायक होती है। हम भी कार्यशाला का संचालन करते हुए देखते हैं कि कौन-कौन महिला हैं, जो भविष्य में सांझी एवं समावेशी पहल समुदाय स्तर पर ले सकती हैं।
कार्यशाला के अंतिम दिन वे अपने प्रपोज़ल पर बात करती हैं, अपना बजट प्रस्तुत करती हैं। फिर उनको एक हफ्ते का समय दिया जाता है कि यदि उन्होंने इन तीन दिनों में कुछ नया जाना-समझा है, तो उसको भी अपने प्रपोज़ल का हिस्सा बना सकती हैं। कोई नया आइडिया भी सामने ला सकती है।
अवध पीपुल्स फोरम ने प्लस ट्रस्ट के साथ मिलकर फैजाबाद, अयोध्या, सुल्तानपुर, बहराइच और जौनपुर से मिलाकर 32 महिलाओं का चयन किया।
फेलोशिप के दौरान मेंटरिंग, एक्सपोज़र विज़िट, ऑनलाइन टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग, फेलो के कामों के आधार पर नेटवर्किंग आदि का सपोर्ट दिया जाता है।
ऊर्जा देने वाले पल
अलग-अलग चारों बैच में काम हुआ है, जिसकी कुछ हाईलाइट इस तरह से हैं:
पहले बैच की कुमकुम ने आज एक स्वतंत्र पत्रकार के तौर पर पहचान बनाई है। यह प्रिंट एवं लेखन दोनों माध्यमों में काम कर रही है। इनको भारतीय प्रतिष्ठान, नई दिल्ली के द्वारा सम्मानित किया गया है।
पहले बैच की शमा परवीन सुल्तानपुर में महिलाओं का व्यापक संगठन संचालित कर रही हैं। इनके साथ लगभग 200 महिलाओं का जुड़ाव है, जो उनके हक-अधिकार और सरकार द्वारा संचालित योजनाओं तक पहुँच बनाने का काम कर रही हैं।
दूसरे बैच की शैलेश सिंह बहराइच में फेलो के तौर पर हमारे साथ जुड़ते हुए युवाओं और महिलाओं के साथ उनके जीवन, कला और कौशल पर काम किया। अपने साथियों के साथ सरजू फाउंडेशन नाम से संस्था का गठन किया। जन साहस में समूह फेलो के तौर पर चयन हुआ। अभी संवैधानिक मूल्यों के विकास की दिशा में संस्थागत काम कर रही हैं। साथ ही RWE में एंकर के तौर पर बहराइच में फेलोशिप का संचालन कर रही हैं।
दूसरे बैच की गुड़िया गुप्ता धनपतगंज, सुल्तानपुर की रहने वाली हैं। महिलाओं का समूह बनाते हुए काम शुरू किया। अपनी खुद की चक्की बनाई और महिलाओं को छोटे-छोटे कामों से स्थानीय स्तर पर जोड़ते हुए काम कर रही हैं। समर्थवान फाउंडेशन नाम से एक संस्था बनाई है, जो महिलाओं के लिए स्थानीय स्तर पर काम बनाने के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक कामों में भागीदारी कर सामूहिक प्रयास में भूमिका अदा कर रही है।
दूसरे बैच की धर्मावती वर्मा अयोध्या जनपद के इटौरा गाँव की रहने वाली हैं। इनका चयन फेलोशिप के लिए हुआ क्योंकि वे अपने समुदाय में किशोरियों के साथ उनके हुनर के विकास पर काम करेंगी। इन्होंने फेलोशिप के दौरान खुद काम करते हुए लेप्रेसी मिशन से सिलाई का कोर्स किया, अपनी प्रतिभा को निखारा। यह कमर से विकलांग हैं, पर इसको कमज़ोरी नहीं समझा बल्कि अयोध्या से बाहर निकलकर चेन्नई और अहमदाबाद में काम करते हुए अपने गाँव की लड़कियों के लिए आदर्श प्रस्तुत किया। अपना जीवन खुद अपनी मेहनत से जी रही हैं।
तीसरे बैच से उल्फत सिद्दीकी मटेरा, बहराइच की रहने वाली हैं। यह स्कूल में क्रिकेट खेलती थी, लेकिन घर वालों ने खेलने नहीं दिया। तो पढ़ाई बेहतर की और अपने गाँव में बच्चों को खेल खेलने के लिए अवसर बनाने का काम किया। अभी वह बहराइच की किसी संस्था में काम कर रही हैं और अपने गाँव में बच्चों के साथ काम कर रही हैं।
तीसरे बैच से एड. तरन्नुम जहाँ को वकालत शुरू करते समय फेलोशिप में चयन किया गया, जिससे इनको शुरुआती दिनों में काम करने में आसानी हुई। अभी यह फुल टाइम अयोध्या सिविल कोर्ट में काम करती हैं। इससे ही अपना जीवन चला रही हैं। इन्होंने कोर्ट में एक स्वतंत्र महिला वकील के तौर पर पहचान बनाई है। ज़रूरतमंद और महिलाएं बहुत से मुकदमे वॉलेंटरी तौर पर लड़ रही हैं।
तीसरे बैच से शबीना बानो का चयन एक बुटीक प्रशिक्षण केंद्र के संचालन के लिए किया गया। यह कादीपुर, सुल्तानपुर में अपने घर पर ही काम कर रही हैं। इन्होंने लगभग चार साल में 44 के करीब लड़कियों को अपने साथ जोड़ते हुए काम किया है। इस काम से यह अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण भी कर रही हैं।
चौथे बैच से मिथलेश मालीपुर, अम्बेडकरनगर की रहने वाली हैं। यह बहुत जुझारू महिला हैं। इन्होंने भी अपने घर पर किशोरियों के साथ उनके नज़रिए के विकास के मुद्दे पर काम किया। सैकड़ों महिलाओं और किशोरियों के साथ जुड़ाव बनाया है। अभी यह सामाजिक-सांस्कृतिक कामों को समझते हुए समूह संस्था बनाने की दिशा में आगे जा रही हैं।
चौथे बैच से खुशनुमा बानो एक आर्टिस्ट महिला हैं। यह सुल्तानपुर शहर में रहकर अपने जैसी विभिन्न महिलाओं को साथ जोड़ रही है। हाथ के हुनर की पहचान बना रही हैं। जो इनके इकोसिस्टम में साधन है और जो सामाजिक रूप से खराब हो रहा है, उसका प्रयोग करते हुए हाथ का पंखा, पैदान, मैट, डेकोरेशन का सामान आदि बनाने वालों की एक टीम बनाई जा रही है। यह अपने काम और इस दौरान हो रही दोस्ती से बहुत उत्साहित है।
नोट: हमारे पुराने फेलो के लिए भी हम नज़रिया विकास एवं संवैधानिक मूल्यों को जीने और अपने समूहों में उतारने की दिशा में काम बना सकते हैं। इसी पुराने फेलो के बीच से मेंटर को भी विकसित कर सकते हैं। हमारी फेलोशिप सिर्फ महिलाओं के लिए ही होगी।

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