म. प्र. की आदिवासी मज़दूर महिलाओं पर साहूकारों की बुरी नज़र

शांता:

मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले के एक पहाड़ी ग्राम के‌ पति और पत्नी, गुजरात में भाग (बंटाई) पर खेती करने गये थे। कुछ समय वहाँ रहने के बाद उस आदिवासी महिला के साथ सेठ (खेत मालिक), संबंध बनाने की कोशिश करने लगा। क्योंकि खेत का करार हुआ था और कुछ पैसा एडवांस लिया था तो सेठ उन्हे वापिस नहीं आने देता। महिला के पति ने कहा कि हम लोग मौका देख कर भाग जाएंगे। 

कुछ दिनों बाद सेठ ने उस माहिला से कहा कि तेरे पति को अपन दोनों मिलकर मार डालते हैं और फिर तू मेरे साथ रहना। उस महिला ने सेठ से कहा कि मेरे पति का बहुत बड़ा परिवार है। एकबार मैं उनसे मिला कर ले आती हूँ आखरी बार। आप मुझे आने-जाने के किराए के रुपये दे दो, मैं एक हफ्ते में गाँव से वापस आ जाऊंगी, तब मेरे पति को मार डालेंगे। वह महिला ऐसे झूठ बोलकर पति को गुजरात से वापिस गाँव ले आई। फिर ये दोनों पति-पत्नी वापस गुजरात नहीं गए। 

जब पंद्रह दिनों में ये वापस नहीं पहुंचे तो 15 दिन बाद सेठ दो व्यक्तियों के साथ, कार से इनके घर पहुँच गया। महिला ने बोला कि ठीक है कल जाएंगे हम लोग। आज आप लोग यहीं सो जाओ। रात को सब सो जायेंगे तब हम मेरे आदमी को मारेंगे और भाग जाएंगे। सुलाने के बाद में रात में महिला ने उठकर घर के पीछे का दरवाज़ा खोल दिया और गाँव वालों को बुला लिया। गाँव के लोग इकट्ठा हो गए और सेठ और उसके आदमी जैसे-तैसे वहाँ से जान बचाकर भागे। 

हम लोग केवल यही सुनते हैं कि मज़दूरों के पैसे ठेकेदार ने ले लिए या औरतों के साथ छेड़-छाड़ होती है। लेकिन यह बहुत खतरनाक है कि वहाँ के सेठ यहाँ की औरतों को रखने के लिए आदमी को मारने तक के षडयंत्र रचने लगे हैं।

फीचर्ड फोटो प्रतीकात्मक है। फोटो आभार : गूगल

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  • शांता आर्य राष्ट्रीय स्तर की जैवलिन थ्रोअर रह चुकी हैं। आजकल वे मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले में आधारशिला शिक्षण केंद्र के माध्यम से आदिवासी बच्चों की शिक्षा व प्रवासी मज़दूरों के मुद्दे पर काम कर रही हैं।

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