मध्य प्रदेश के प्रवासी मज़दूरों के शोषण और उत्पीड़न पर आवाज़ उठाई क्षेत्र के संगठनों ने

जागृत आदिवासी दलित संगठन:

गुरुवार 25 फ़रवरी 2022 को बड़वानी ज़िले में जागृत आदिवासी दलित संगठन द्वारा आदिवासियों से बेगारी करवाने एवं मज़दूरों के साथ हो रहे हिंसा एवं यौन शोषण के विरोध में शासन-प्रशासन की निष्क्रियता के चलते, जागृत आदिवासी दलित संगठन सहित क्षेत्र के आदिवासियों ने रैली निकाल कर पाटी के जनपद कार्यालय का घेराव किया। 3-4 महीने दिन-रात लगातार काम करने के बावजूद मज़दूरी न मिलने, काम के दौरान महिलाओं के बलात्कार, यौन हिंसा के मामलों को लेकर मज़दूरों द्वारा प्रशासन से कार्यवाही की मांग की जा चुकी है। फसलों का सही भाव न मिलने से आदिवासी कर्ज़ में डूबते जा रहे है। पलायन रोक पाने की तहत शुरू हुआ नरेगा को खत्म करने की कोशिश की जा रही है। निजीकरण के चलते, शिक्षा और रोज़गार के अवसर खत्म हो रहे है; युवा पीढ़ी के पास पलायन करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बच रहा!

संगठन कार्यकर्ताओं द्वारा मध्य प्रदेश सरकार से सवाल किए गए – आज जब आदिवासी शिक्षा और रोज़गार की मांग कर रहे, उन्हें मिल रही है ठेकेदारों और सेठों की गुलामी और बेगारी – क्या मध्य प्रदेश के आदिवासियों के लिए यही विकास है? आदिवासियों की सरकार कहाँ है? बिना लाइसेन्स के ठेकेदार, गाँव में आकार, 30 से 40 हज़ार कर्ज़ देकर, काम के बारे में झूठे आश्वासन देते हुए आदिवासियों की तस्करी कर, महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में उनसे बेगारी करवाते है। काम के दौरान न मज़दूरों को कोई न कोई मज़दूरी दी जाती है, न उनके किए गए काम का हिसाब।

बेलगावी, कर्नाटक में काम का हिसाब मांगने पर, ठेकेदारों और फ़ैक्टरी वालों द्वारा 3 मज़दूरों को 6 दिन तक निरानी फ़ैक्टरी में बंधक बनाया गया! वहीं, सतारा में मज़दूरों को काम न करने पर जान से मारने की धमकी दी गयी, यहाँ तक कि 6 दिन पहले बच्चे को जन्म दी महिलाओं से भी काम करवाया जाता रहा। महिलाओं के साथ ठेकदारों और सेठों द्वारा यौन शोषण, बलात्कार के रोंगटे खड़े कर देने वाले मामले सामने आए – सतारा से लौटी 16 वर्षीय नाबालिक लड़की का ठेकेदारों द्वारा कई बार सामूहिक बलात्कार किया गया, जिसके बारे में बड़वानी पहुँच कर ही पूरी सच्चाई मालूम हो पाई। जबकि बाकी सभी लोगों से 16-18 घंटे काम करवाया जाता रहा और उन्हें पैसे भी नहीं दिए जा रहे थे।

कुल छुड़ाए गए 309 कामगारों में से 87 महिलाएं और 127 बच्चे हैं। संगठन के मुताबिक इनमें से 83 मज़दूर कर्नाटक के बेलगावी में स्थित निरानी सुगर लिमिटेड में काम पर रखे गए थे। इनमें 27 बच्चे और 30 महिलाएं भी शामिल थीं। बड़वानी लेबर कोर्ट के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, दूसरे 227 मजदूरों को महाराष्ट्र के बागलकोट, कोल्हापुर, सतारा और पुणे जिलों की मिलों से छुड़ाया गया है। इनमें 87 महिलाएं व 57 बच्चे शामिल हैं।

रैली निकाल कर संगठन ने अपनी मांगे प्रशासन के सामने रखीं। इनमें से कुछ बिंदु इस प्रकार से हैं –

  1. आदिवासियों द्वारा सरकार से हर पंचायत में से मज़दूरों को ले जाने वाले ठेकेदारों के पास लाइसेन्स हो,
  2. मज़दूरों का विधिवत पंजीयन किया जाए, तथा
  3. अंतरराजीय प्रवासी कामगार अधिनियम के अनुसार, मज़दूरों को पासबूक दिए जाने की मांग भी उठाई गई।

संगठन ने मध्य प्रदेश शासन एवं बड़वानी प्रशासन से एक हफ्ते के अंदर, कार्यवाही की मांग की गई है, और साथ ही, बंधुआ मज़दूरी में फंसे हुए मज़दूरों के लिए एक हेल्पलाइन नंबर भी स्थापित करने की मांग की है।

पूरी घटना पर विस्तृत लेख आप निचे दिए शीर्षक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं –
मध्य प्रदेश के जनजातीय प्रवासी मज़दूरों के शोषण और यौन उत्पीड़न की कहानी

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