आइये जानते हैं कि क्या बदलाव होते हैं महिलाओं के शरीर में

श्रुति सोनकर:

महिलाएँ कभी बीमार नहीं पड़ती हैं, उनको तो बस छोटी-मोटी बीमारियाँ होती हैं। ऐसा लोगों का कहना है, आइये आज जानते हैं कि क्या-क्या बदलाव होते हैं महिलाओं के शरीर में। महिलाएं अपने रूटीन में इतनी बिजी रहती हैं कि अपनी हेल्थ/सेहत पर बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे पाती हैं। फिर वो चाहे स्कूल जाने वाली लड़की हो या कॉलेज की बालिका या ऑफिस जाने वाली कामकाजी महिला हो, हाउस वाइफ हो या फिर एक बड़ी उम्र की महिला। बिजी होने के कारण वह अपनी डाइट को हमेशा नज़रअंदाज़ करती है, जबकि उम्र के पड़ावों में होने वाले हार्मोनल बदलाव के कारण उन्हें अपनी स्वास्थ्य की ज़्यादा केयर करनी चाहिए। हम अक्सर देखते हैं कि ज़्यादातर महिलाओं को अपनी ही हेल्थ की फ़िक्र नहीं होती है और उन्हें लगता है कि बस मेरा पति, बच्चे और परिवार हेल्दी रहे और मैं तो ठीक ही रहती हूँ। जैसा कि हम जानते होंगे कि अधिकांश लड़कियों को जन्म के बाद पाँच पड़ावों से गुज़रना होता है; यानि – बचपन, किशोरावस्था, वयस्कता, मातृत्व और मीनोपॉज। इस दौरान लड़कियों में शारीरिक बदलावों के साथ-साथ मानसिक बदलाव भी होते हैं।

बचपन इस दौरान किसी भी छोटे बच्चे की तरह लकड़ी अपनी देखभाल खुद से नहीं कर सकती है, क्योंकि वह छोटी होती है। इस पड़ाव में बढ़ती बच्ची को सही समय पर पौष्टिक खाने की आदत डालें जैसे हरी सब्ज़ी, दाल का पानी, अंडे, फल और दलिया आदि।

किशोरावस्था- इस दौरान शरीर में सबसे ज़्यादा बदलाव होते हैं। जैसे एस्ट्रोजन हार्मोन के बढ़ने से ब्रेस्ट (स्तनो) का विकास होना, हड्डियों का विकास होना, आवाज़ में बदलाव, लंबाई बढ़ना और मासिक धर्म का शुरू होना। लड़कियों के शरीर में हार्मोन में होने वाले बदलाव की वजह से गर्भाशय से रक्त और अंदरूनी हिस्से से होने वाले स्त्राव को मासिक धर्म कहते हैं। मासिक धर्म की कोई एक तय उम्र नहीं होती है। लड़कियों को 8 से 17 साल तक उम्र के बीच में मासिक धर्म या पीरियड्स शुरू हो सकते हैं। सामान्य तौर पर 11 से 13 वर्ष की उम्र में लड़कियों का मासिक धर्म शुरू हो जाता है। इस समय अपनी डाइट को लेकर लापरवाह नहीं होना चाहिए। लड़कियों को अच्छी डाइट देनी चाहिए, ताकि शरीर में ब्लड की कमी ना हो और उनके आहार में आयरन, हाई कैलोरी व प्रोटीन युक्त चीज़ों को शामिल करना चाहिए। 

वयस्कता- कानून के अनुसार वयस्कता प्राप्त करने की सामान्य आयु 18 वर्ष है, जो किसी लड़की के लिए शादी करने की न्यूनतम आयु भी है। शादी के बाद लड़कियों की जिंदगी बहुत बदल जाती है, नई ज़िम्मेदारियों के साथ वह एक नई ज़िंदगी में प्रवेश करती हैं। नई ज़िम्मेदारियों के साथ नए रिश्ते जुड़ते है और लड़की के जीवन जीने का नज़रिया भी बदलता है। शादी के बाद लड़कियों को शारीरिक व मानसिक बदलाव का भी सामना करना पड़ता है, क्योंकि हर बात को लेकर सोच बदल जाती है और किसी भी काम को करने से पहले उसे बहुत सोचना पड़ता है। ऐसे में वह अपना देखभाल नहीं कर पाती है लेकिन इस उम्र में लड़कियों/महिलाओं को अपना खास ख्याल रखना चाहिए और अपने डाइट का पूरा ध्यान देना चाहिए।

मातृत्व- माँ बनने का एहसास कुछ अलग ही होता है। शायद ये उसके ज़िदगी का सबसे अच्छा पड़ाव होता है। लेकिन एक माँ बनना और उसकी ज़िम्मेदारियों को निभाना किसी चुनौती से कम नहीं होता है। वह माँ बनने की खुशी में और अपने बच्चों में इतना खो जाती है कि खुद को शायद वो भूल ही जाती है। लेकिन वह यह नहीं जानती कि उसके बच्चे को सही पोषण तभी मिलेगा जब वह अपनी देखभाल अच्छे से करेगी। इसीलिए इस पड़ाव के दौरान महिलाओं को बच्चे के साथ-साथ अपनी भी देखभाल करनी चाहिए।

मीनोपॉज- मासिक धर्म या पीरियडस बंद होने के बाद महिलाओं की लाइफ में यह पड़ाव आता है। इस पड़ाव में हार्मोन में बदलाव के कारण शरीर में जलन, नींद ना आना, हार्ट बीट का तेज़ होना, बात-बात पर गुस्सा आना, बालों का सफेद होना, जैसे लक्षण दिखने के साथ-साथ कैल्शियम की कमी के चलते शरीर कमज़ोर भी हो जाता है। लेकिन ऐसे समय में भी महिलाएँ अपना ध्यान नहीं रखती। तो इसलिए डाइट में ऐसा खाना खाए जिसमें बहुत सारा कैल्शियम और मिनरल हो। 

जैसा कि हम सभी जान ही चुके हैं कि उम्र के हर पड़ाव में महिलाओं कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उम्र बढ़ाने के साथ शरीर में बदलाव आना लाजमी है पर क्या हम महिलाओं का ध्यान, हमारे शरीर में होने वाले बदलाव पर कभी गया है या इसके बारे में हमने कभी सोचा है? और इसकी अनदेखी करने से हम कितनी बीमारियों का सामना करते हैं और कितनी परेशानियों खुद ही झेलनी पड़ती हैं? इसलिए लापरवाही न करें और अपनी डाइट का खयाल रखे और समय-समय पर चेकअप कराते रहें।

फीचर्ड फोटो आभार: ग्राफ़िकरिवर

Author

  • श्रुति, उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद ज़िले की रहने वाली हैं और बी.ए. (तीसरे साल) की छात्रा हैं। नई चीज़ों को जानने में दिलचस्पी रखने वाली श्रुति को स्टोरी बुक पढ़ना पसंद है और अलग-अलग जगहों पर जाकर वहां के रहन-सहन और लोगों के बारे में जानना अच्छा लगता है। साथ ही श्रुति ने अपने क्षेत्र और समुदाय की लड़कियों के साथ पढ़ाई, स्वास्थ्य और जेंडर समानता जैसे विषयों पर चर्चा करने की पहल भी शुरू की है।

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