गुफरान: साथियों 14 नवम्बर बीत चूका है जिसे हम सभी “बाल दिवस” के नाम से जानते हैं। बचपन से आज… READ MORE
Mudita Chandra: In the desert’s heart, they rise from dust and denial,Bhil, Rajput, Meena,names etched by caste and survival.Their veils… READ MORE
श्रुतिका शाह : लहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?मैं पूछता हूँलहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?नब्ज़… READ MORE
अंजू मल्होत्रा: शादी से पहले पिता… और शादी के बाद पति –दो ऐसे रिश्ते होते हैं, जो हमारे चारों ओर… READ MORE
हफ़्सा नाज़: मैं माँ बन गई हूँ यक़ीन-सा नहीं आता है।एक मासूम-सा चेहरा मानों पूरी ज़िंदगी बन गया है।कहाँ मैं… READ MORE
गुफरान : यह पंक्तियाँ केवल एक गीत नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन हैं। इन्हें लिखने वाले थे जनता के गीतकार… READ MORE
हफ़्सा नाज़: सुना है मौसम बहुत ख़ुशगवार हैसुना है मौसम बहुत ख़ुशगवार है।।उनके लिए जिन्हें मौक़ा मिल गया हैखुलेआम रेप… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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