आस्तिकता और नास्तिकता से परे है हमारी संस्कृति

पावनी: एक बार मेरे पापा के दोस्त हमारे घर आए हुए थे। दूर का सफ़र था इसलिए रात को वो हमारे घर ही रुके। उनके

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बस एक दिन…!

पावनी: छूना है आसमान, उन उड़ते परिंदों की तरह,मुझे भी एक दिन..।  उन छोटी-बड़ी मछलियों की तरह,देखनी है सागर की गहराइयाँ,मुझे भी एक दिन..। उन छोटे-बड़े

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दिल्ली की सैर

पावनी: दिल्ली शहर में गयी पहली बार, सोचा देखूंगी लाल किला और कुतुबमीनार, दो-मंजली गाड़ी में बैठी पहली बार, वहां से दिखी मुझे एक मीनार,

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उत्तराखंड के कुमाऊँ अंचल के लोद और गल्ला गांव की एक दंतकथा

पावनी: उत्तराखंड में कई दंतकथाएं मौजूद हैं। दंतकथा मतलब ऐसी कहानियाँ या बातें जो कहीं लिखीं नहीं गई, किन्तु परंपरागत रूप से सुनी जाती हैं

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