पावनी:
तुम्हें बढ़ना है
उस पथ की ओर
जो इंकलाब की बोलियों से सजा है
तुम्हें बढ़ना है
उस पथ की ओर
जो इंसाफ के आसमान से खिल उठा है
तुम्हें बढ़ना है,
उस पथ की ओर
जो तिरंगे के लहराने से झूम उठा है
तुम्हें बढ़ना है,
क्रांति पथ पर
तुम्हें लानी है एक नई क्रांति (x2)
अत्याचार के ख़िलाफ़, चुप्पी के ख़िलाफ़,
हिंसा के ख़िलाफ़,
तुम्हें लानी है एक नई क्रांति
भेदभाव के ख़िलाफ़,
तुम्हें लानी है क्रांति बराबरी की,
तुम्हें ये क्रांतियाँ लानी ही होंगी,
तुम्हें चलना होगा क्रांति पथ पर

Author
-
View all postsपावनी कक्षा आठ में पढ़ती है और उत्तराखंड के नैनीताल ज़िले से हैं। वह लोक कथाओं, लोक संस्कृति और लोक संगीत में रूचि रखती हैं।

Leave a Reply