देश के गांवों की तरफ बढ़ते कोरोना के कदम

चेतना ब्राह्मणे: 

चीन के वुहान शहर से फैलने वाले कोरोना वायरस ने पूरे विश्व में तबाही मचा दी है, इसने अब तक लाखों लोगों की जान ले ली है और लाखों लोग अभी भी इससे ग्रसित हैं। सरकारें और लोग अपने-अपने स्तर पर इस महामारी से निपटने के लिए जूझ रहे हैं।

पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष कोरोना वायरस शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी अधिक फैलने लगा है। बड़वानी जिले की पानसेमल तहसील के बालझिरी गाँव में पिछले वर्ष कुछ कोरोना केस हुए थे लेकिन किसी की मौत नहीं हुई, जबकि इस वर्ष कई सारे लोगों की कोरोना से जान चली गई। इससे गांव में बहुत दुखद स्थिति पैदा हो गई है।

शहरों से गांवों में कोरोना के फैलने का मुख्य कारण आवाजाही के लिए सुगम व्यवस्था है। लोग आसानी से कभी भी शहरों की ओर चले जाते हैं। हालांकि वायरस का प्रभाव गांव के लोगों पर इतना अधिक भी नहीं पड़ा है जितना हमें मोबाइलों पर सोशल मीडिया, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, स्नैपचैट आदि द्वारा हमें दिखाया जा रहा है। भ्रामक खबरों के कारण गाँव के लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। कुछ लोगों की इस वायरस से मौत भी हो गई है, लेकिन अभी धीरे-धीरे लोगों में सुधार की स्थिति भी आ रही है।

भारत में कोरोना वायरस को रोकने के लिए कोवैक्सीन और कोविड शील्ड नामक टीके लगाए जा रहे हैं। इन वैक्सीनों को लेकर भी लोगों में भ्रम फैला हुआ है कि इनको लगाने से इंसान की मृत्यु हो जाती है और इसका उपयोग गरीबों को मारने के लिए किया जा रहा है। डार्विन के अनुसार जिस व्यक्ति की इम्यूनिटी की क्षमता अधिक होगी वह अधिक समय तक जीवित रह पाएगा। 

मेरे विचार से गाँव में यह भ्रम की स्थिति सोशल मीडिया तथा शिक्षित लोगों के द्वारा पैदा की गई है। जबकि मैं मानती हूं कि कोरोना वैक्सीन का इस्तेमाल करना चाहिए ताकि कोरोना से मरने वालों के आंकड़ों में कमी आएगी व शरीर में वायरस से लड़ने की क्षमता पैदा हो जाएगी। 

फीचर्ड फोटो आभार : फ़्लिकर

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  • चेतना ब्राह्मणे, मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले से हैं। वह आधारशिला शिक्षण केंद्र, साकड़ की भूतपूर्व छात्रा हैं। इन्होंने बी.ई. सिविल से स्नातक किया हुआ है।

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