अरबिंद भगत: हम अच्छे भले जी रहे थेइस दुनिया से दूर,जिसे सभ्य कहा जाता है आज। हम जी रहे अपनी… READ MORE
मोहन सिंह: हमे लूट रही मिल के, जा सरकार… x 2 जाग-जाग नौजवान तू जाग,अपने हक़-अधिकार को पहचान..जाग-जाग नौजवान तू… READ MORE
विश्वजीत नास्तिक:अररिया, बिहार | कक्षा 12वी तेरी यादों का मौसम,बेमौसम बरसात की तरह है…,जब भी आती है,मुझे भीगा जाती है…।… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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