हमे लूट रही मिल के, जा सरकार…

मोहन सिंह: हमे लूट रही मिल के, जा सरकार… x 2 जाग-जाग नौजवान तू जाग,अपने हक़-अधिकार को पहचान..जाग-जाग नौजवान तू जाग,अपने हक़-अधिकार को पहचान..हमे लूट

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यादों का मौसम

विश्वजीत नास्तिक:अररिया, बिहार | कक्षा 12वी तेरी यादों का मौसम,बेमौसम बरसात की तरह है…,जब भी आती है,मुझे भीगा जाती है…। तेरी जुल्फों की महक,निशा की

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ଦାଦନ ଗୀତ (प्रवासी मज़दूर का गीत)

लोचन बरिहा: ପେଟର୍ ଲାଗି ଯାଉଛୁ ବିଦେଶ ଇଟ ଭାଟାରେଛାଡି ଗାଁ ମାଁ ମାଟିବିଦେଶର କଥା ନେଇ ଯାନୁ କିଛି ରେ ଛାଡି ଗାଁ ମାଁ ମାଟିଆଁଖିର୍ ପାନି ଆଁଖି ଯଉଛେ ଶୁଖି. ପେଟର

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