संजीव कुमार: अगर रुकूँ तो जाऊं कहाँ, अगर रुकों तो जाओं कहाँमेरे यूँ रुक जाने से, यूँ थक बैठ जाने… READ MORE
नेहा कुमारी: भीमराव थे बहुत महानकरते थे सबका सम्मान।। छुआछूत से था लाचारसंविधान लिखकर बना अपार।। दलित के नाम पर… READ MORE
आकाशी पांडे: देखोदो अलग-अलग नदियाँकैसे एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं।एक अलकनंदा,और दूसरी भागीरथी।।जल का मिलना तो सहज है,पर उनके… READ MORE
हफ़्सा नाज़: सुना है मौसम बहुत ख़ुशगवार हैसुना है मौसम बहुत ख़ुशगवार है।।उनके लिए जिन्हें मौक़ा मिल गया हैखुलेआम रेप… READ MORE
सूर्यकांत गिरि: तुम तो एक पहेली हो, मैं कैसे तुमको सुलझाऊँ।नीरव रजनी में जगने पर, मैं कैसे मन को बहलाऊँ… READ MORE
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श्रुतिका साह: मैं रचूंगी तुम्हारे लिएइस शताब्दी की सबसे विवादित नज़्म,जिसकी शुरुआती पंक्तियों में ज़िक्र होगाउस दीये काजोमैं तुम्हारे अंतस… READ MORE
छोटूसिंह रावत : जहाँ न भीड़ हो, न शोर हो,बस हवाओं में ख़ामोशी का जोर हो,उस जगह पर हम हों।जहाँ… READ MORE
श्रुतिका साह: छलांगो और छलांगो…कभी आसमां जकड़ने की कामना से छलांगो,कभी तपते सूरज को लाठी पर से सरकाने की उम्मीद… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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