अंतर निगवाले : बरखा आई धरती हँसी,घनघोर घटा गगन में बसी।ढोल मांदल बजे गाँव में,धरा में खेती किसानी हवाएं चलीहरिया… READ MORE
संजीव कुमार : कुछ पल बैठूं तेरे साथबयां करूं अपने हालत,जिंदा हूं कैसे यह,सहकरज़बरन भ्रष्टाचारी कुविचार। कह रहे हैं लोग… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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