जीनित सामाद: भारत का ग्रामीण समाज लंबे समय से आजीविका, पलायन और असुरक्षा के त्रिकोण में फंसा रहा है। ऐसे… READ MORE
कोमल:यह तस्वीरे दिल्ली के बदरपुर बॉर्डर की है जहाँ पर महिला मज़दूर अपने तोड़े गए घर के मलबे को बेचकर… READ MORE
मीना जादव : ‘मज़दूर’ शब्द सुनते ही हमारे दिमाग में अक्सर एक पुरुष मज़दूर की छवि उभरकर आती है, जबकि… READ MORE
जयश्री: हम में से बहुत से लोग अंडे बड़ी खुशी से खाते हैं, शहरों में तो यह नाश्ते का सबसे… READ MORE
देवेंद्र बघेल: दलित आदिवासी मंच संगठन के साथी देवेंद्र बघेल व राज्य के कुछ अन्य संगठनों के करीब 8 साथी… READ MORE
अखिलेश: सुरेश शर्मा, सहरसा ज़िले के एक छोटे से गाँव कानोवा के रहने वाले हैं। सुरेश बहुत ही गरीब परिवार… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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