उन्होने भी अंजलि को उस नज़र से देखना बंद कर दिया और सभी उसके साथ मेरी तरह रहने लगे। अब… READ MORE
कमला भसीन: एक पिता अपनी बेटी से कहता है –पढ़ना है! पढ़ना है! तुम्हें क्यों पढ़ना है?पढ़ने को बेटे काफ़ी… READ MORE
ଜ୍ୟୋତି ଜୋଜୋ: ପ୍ରିୟଦର୍ଶିନୀ ମହିଳା ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ରେ ପଢୁଥିବା ମୁଁ ଜଣେ ଛାତ୍ରୀ। ପ୍ରତି ବର୍ଷ ପରି ଏ ବର୍ଷ ମଧ୍ୟ ଆମ ମହାବିଦ୍ୟାଳୟ ରେ ମହିଳା… READ MORE
शीबा अज़ीज़: हर दौर में लड़कियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, लड़की बनकर पैदा होना ही उनके लिए… READ MORE
शुभम पांडेय: पिछले कुछ वर्षों में, भारत में महिला सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। अपराध की दर लगातार… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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