मंजूलता मिरी: ग्रामीण और आदिवासी समुदायों में महिलाओं के पास भूमि स्वामित्व न होना उनकी सबसे बड़ी असुरक्षा रही है।… READ MORE
श्रीपति सिंकू: ଆଦିବାସୀ ସମାଜ ପ୍ରକୃତିର ଏକ ଅଙ୍ଗ ହୋଇ ଆଦିମ କାଳରୁ ରହି ଆସିଛି।ବଣ, ଜଙ୍ଗଲ ଓ ଜଙ୍ଗଲରେ ବସବାସ କରୁଥିବା ଜୀବ ଜନ୍ତୁ ମାନଙ୍କ… READ MORE
जंग हिंदुस्तानी: जंगल के बीचों-बीच बसे इस गाँव में आज काफी चहल-पहल थी। इस गाँव में दोनों तरफ से नदी… READ MORE
एलीन लकड़ा: जीवन में जब भी कोई मेरे हॉबीस के बारे में पूछते रहे हैं, और मेरे मन में हमेशा… READ MORE
दामोदर सिंह हंसदा: हो आदिवासी समाज में सभी पर्व मानव जन्म के साथ जुड़े हुए हैं। पोरोब-पोनाई (पर्व त्यौहार) को… READ MORE
मंजुलता मिरी: मेरा नाम मंजुलता मिरी है। मेरे पति का नाम परसराम मिरी है। मैं दलित समुदाय से हूँ। छत्तीसगढ़… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
Designed with WordPress