संजीव कुमार: अगर रुकूँ तो जाऊं कहाँ, अगर रुकों तो जाओं कहाँमेरे यूँ रुक जाने से, यूँ थक बैठ जाने… READ MORE
नेहा कुमारी: भीमराव थे बहुत महानकरते थे सबका सम्मान।। छुआछूत से था लाचारसंविधान लिखकर बना अपार।। दलित के नाम पर… READ MORE
आकाशी पांडे: देखोदो अलग-अलग नदियाँकैसे एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं।एक अलकनंदा,और दूसरी भागीरथी।।जल का मिलना तो सहज है,पर उनके… READ MORE
श्रुतिका साह: छलांगो और छलांगो…कभी आसमां जकड़ने की कामना से छलांगो,कभी तपते सूरज को लाठी पर से सरकाने की उम्मीद… READ MORE
अंजू मल्होत्रा: मैं और मेरी तन्हाई,अक्सर ये बातें करते हैं,आप होते तो कैसा होता,आप ये कहते, मैं वो कहती,आप इस… READ MORE
जिनित सामाद : आओ बताऊं साथी कि मैं आज-कल क्या देख रहा हूँशायद आप भी वही देख रहे हो, जो… READ MORE
निराला: चलो गाएं जीवन का गीत।चलो गाएं जीवन का गीत।।हम दुनिया में सबके मीत।हम दुनिया में सबके मीत।।चलो ………… नया… READ MORE
मिनाक्षी : क्या आज़ाद हैं हम…?बंधी तो नहीं हैं ज़ंजीरों में, फिर भी बंधे हुए हैं हम।डाली तो नहीं पाऊं… READ MORE
विश्व आदिवासी दिवस पर एक सवाल हम आदिवासियों की तरफ सेअरविंद भगत: आज पूरी दुनियामना रही हैआदिवासी दिवसनिकल रहे हैं… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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