निराला:

चलो गाएं जीवन का गीत।
चलो गाएं जीवन का गीत।।
हम दुनिया में सबके मीत।
हम दुनिया में सबके मीत।।
चलो …………

नया सवेरा लाएंगे।
दुश्मन को मार भगाएंगे।।
घर-घर अलख जगाएंगे।
नई आज़ादी लाएंगे।।
पूरब से सूरज झांक रहा।
ये भ्रष्ट व्यवस्था कांप रहा।।
हम मिलकर लड़ते जाएंगे।
हम आगे बढ़ते जाएंगे।।

चलो गाएं जीवन का गीत।
हम दुनिया में सबके मीत।।…….2

Author

  • मिथिलेश कुमार निराला / Mithilesh Kumar Nirala

    मिथिलेश कुमार निराला बिहार के गया जिले के गम्हरिया ग्राम से हैं। वह 1979 से समाजिक कार्यों से जुड़े हुए हैं और महज 8 वर्ष की उम्र में उन्होंने छात्र युवा संघर्ष वाहिनी से जुड़कर अपने सामाजिक यात्रा की शुरुआत की थी। वह बोध गया भूमि आंदोलन में भी सक्रिय रूप से शामिल थे। इसके अलावा, वह जन गीत की रचना और प्रस्तुति में भी सक्रिय रहे हैं और मगधी कला मंच जैसे सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े हुए हैं।उनकी विशेष रुचि विभिन्न जन संघर्षों का गहन अध्ययन करने में
    है। उनका मुख्य उद्देश्य समानता पर आधारित समता मुल्क समाज की स्थापना करना और पूरी दुनिया में समाजवाद की स्थापना करना है।

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