जुहेब आज़ाद: बुनकर समुदाय के लोग अपने असाधारण बुनाई कौशल के लिए जाने जाते रहे हैं, भारत के पारंपरिक कपड़ा… READ MORE
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हाफीज़ किद्वाई: इन्हें भोजपुरी का शेक्सपियर कहते हैं, मगर मुझे ऐसी संज्ञाएँ नापसंद हैं। अगर कोई शेक्सपियर को पश्चिम का… READ MORE
अखिलेश: सुरेश शर्मा, सहरसा ज़िले के एक छोटे से गाँव कानोवा के रहने वाले हैं। सुरेश बहुत ही गरीब परिवार… READ MORE
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कमलजीत कौर: “हुर्रर्रर्र… हेहेहेहे…हौ…हेहेहेहे…हौ…” सूरज ने डरावनी सी आवाज़ निकाली और देखते ही देखते बाग़ से भागते पक्षियों ने आसमान… READ MORE
सुनील पासवान: ‘हमें ये शौक है, देखें सितम की इंतेहा क्या है।’ मेरे पापा श्री दीपानारायण पासवान, उफ़रेल चौक, वार्ड… READ MORE
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नौशेरवाँ आदिल: नेता लोग कहते हैं कि गरीबी नहीं है। जो भी लोग गरीब हैं वह कामचोर हैं, आलसी हैं… READ MORE
मेरे पापा ऐसी परिस्थिति से एकदम भी नही घबराते हैं। उनका हँसता हुआ चेहरा हम सभी को बहुत हिम्मत दे… READ MORE
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जब मांडवी बीडीओ के दफ्तर पहुंची तो उसके स्टाफ ने कहा कि 1100 रुपए देंगी तो आपको जोड़ देंगे। यह… READ MORE
नरेश धड़कार एक गरीब घर से थे I वो एक कारीगर थे, जो रोज़ बांस की टोकरी और गर्मी के… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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