हमें मज़बूत प्रजातंत्र तो चाहिए लेकिन मज़बूत बच्चे क्यों नहीं?

डा. गणेश माँझी: आज की परीक्षा का रद्द होना, कल के लिए बड़ी समस्या है। मानते हैं कि कोरोना बहुत बड़ी महामारी है, लेकिन ये

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क्या बाज़ार के दांव-पेच सीख रहे हैं आदिवासी समुदाय?

डॉ. गणेश मांझी: अक्सर, आदिवासी समाज बाज़ार से भागता रहा है, लेकिन बाज़ार ने इनका पीछा कभी नहीं छोड़ा। वस्तुओं के आदान-प्रदान और परस्पर सहयोग

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आदिवासी समरसता, एकता और प्रजातांत्रिक राजनीति को व्यापक बनाता है शब्द ‘जोहार’

डा. गणेश माँझी: ‘जोहार’ – मुख्यतः झारखण्ड के छोटानागपुर और संताल परगना में प्रचलित अभिवादन है। जो बचपन से अभी तक समझ में आया है

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देश के युवा, आईएएस के “साहब” और संसाधनो का बेतरतीब आवंटन

डॉ. गणेश मांझी: 2019 में लगभग 11.35 लाख और 2020 में लगभग 10.6 लाख लोगों ने भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए आवेदन दिए थे और

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प्राकृतिक आस्था और आदिवासी अध्यात्म का प्रतीक “सरना”

डा. गणेश माँझी: “सरना” शब्द आज पूरी दुनिया जानती है। इस शब्द के गहराई और शुरुआत में जाएँ तो शायद ही ये शब्द किसी आदिवासी

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