कोर्दुला कुजूर: झारखंड के सभी आदिवासी समाजों में बीज बोने की रीतियाँ और परंपराएँ लगभग एक जैसी हैं। साथ ही… READ MORE
मनीषा शहारे: गर्मियों में और बरसात में धान की खेती होती है। पहले पारंपरिक तरीके से खेती की जाती थी।… READ MORE
हीरालाल लववंशी: हमारे क्षेत्र में खरीफ की फसल पूर्णतः बारिश पर आधारित है। कई बार बारिश के अभाव में बीज… READ MORE
जीवतलाल परमार: दक्षिण राजस्थान का आदिवासी अंचल अपनी समृद्ध संस्कृति, प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव और पारंपरिक कृषि व्यवस्था के… READ MORE
गिरीश कुमार: छत्तीसगढ़ को लंबे समय से “धान का कटोरा” कहा जाता रहा है। यह पहचान जहाँ एक ओर धान… READ MORE
दिपक कांबळे आधुनिक पद्धतीला छेद देत युवा शेतकरी पारंपरिक पद्धतीने शेतीकडे वळताना दिसत आहे. ‘जुनं ते सोनं’ या म्हणीप्रमाणे आज… READ MORE
जितेन्द्र मांझी द्वारा लिखित एवं राजू द्वारा संपादित: कंध आदिवासी समुदाय जिन्हें खोंड या कोंध के नाम से भी जाना… READ MORE
अनिल, रेखा और सहोदय के बच्चे: वर्तमान में सहोदय में 22 बच्चे, और पांच व्यस्क रह रहे हैं। कल (07… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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