Mudita Chandra: In the desert’s heart, they rise from dust and denial,Bhil, Rajput, Meena,names etched by caste and survival.Their veils… READ MORE
श्रुतिका शाह : लहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?मैं पूछता हूँलहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?नब्ज़… READ MORE
दीपक रंजीत : कैसे एक मृतप्राय आंदोलन को – “उत्तराखंड मेरी मातृभूमि, उत्तराखंड मेरी पितृभूमि” – गीत गाकर फिर से… READ MORE
गुफरान : यह पंक्तियाँ केवल एक गीत नहीं, बल्कि जीवन का दर्शन हैं। इन्हें लिखने वाले थे जनता के गीतकार… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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