वर्षा बर्मन : कमजोर, अबला, बेसहारा कहकर खुद कोलाचारों-सा बर्ताव नहीं करूंगी आज,नारीत्व की श्रेष्ठता का गान गवा करबेमतलब सम्मान… READ MORE
सौम्या रिहा: जब आप ट्रेन में बैठते हैं तो मुझे लगता है कि आपको किताब और फ़ोन की ज़रुरत नहीं… READ MORE
शैलेश सिंह: मैं शैलेश स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के दौरान, केंद्र पर आने वाली सभी युवतियों से मिलना-जुलना कर रही… READ MORE
कोर्दूला कुजूर: महिलाओं के लिए संभावनाएँ और चुनौतियाँ समाज में एक महत्वपूर्ण विषय है। महिलाएँ के लिए अब अपने जीवन… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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