कोर्दुला कुजूर

झारखंड स्थित महुआडांड़ प्रखण्ड के पाठ आम्रगामी महिला संघ के तत्वावधान में, दिनांक 27 से 29 मई 2023 तक खाद्य प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में 24 महिलाएं और 6 पुरूष शामिल हुए। प्रशिक्षण में महुआ और मड़ुआ के विभिन्न उत्पाद –  महुआ का गुलगुला, महुआ सिरप, महुआ का बादाम चिकी, महुआ का लड्डू, महुआ गुलाब जामुन, टोफी, कुकीज़, महुआ का अचार, और महुआ का चुड़ा कैसे बना सकते हैं सिखाया गया। इस प्रशिक्षण में महिलाओं ने महुआ और मड़ुआ के गुणों को बहुत बारीकी से सीखा। 

बोनस के रूप में उन्हें शतावर के उपयोगिता, निर्गुंडी से दर्द निवारक तेल बना़ना, बाकस एवं गिलोई तथा विभिन्न औषधिय पौधों एवं उनकी उपयोगिताएं बतायी गई। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को दो-दो समूहों में बाँट कर हर रेसिपी को बेहतर तरीके से सिखाने हेतु उनसे प्रक्टिकल भी कराया गया।

प्रशिक्षक के रूप में महाराष्ट्र के गढ़चिरौली ज़िले के कुरखेडा़ क्षेत्र से सुश्री सुष्मिता और शालिनी ताई आईं थीं। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में ओरसा ग्राम सभा, चिरो पारिश के पारिशनरस, की स्टोन फाउंडेशन एवं पाठ अग्रगामी महिला संघ का विशेष सहयोग रहा। इस कार्यक्रम को झारखंड के लातेहार जिला में आयोजित कराने में अमित दा का भी विशेष सहयोग रहा।

Author

  • कोर्दुला कुजूर आदिवासी एक्टिविस्ट हैं और रांची, झारखंड में रहती हैं। महिलाओं और बच्चों के सवालों पर वह लंबे समय तक काम करते आ रही है और झारखंडी आदिवासी वुमेन्स एसोशियन शुरुआत करने में प्रमुख भूमिका निभाई हैं। साथ ही झारखंडी आदिवासियों के भाषा आंदोलन के सहभागी बनकर कुड़ुख भाषा को बचाए रखने का महत्वपूर्ण भूमिका निभाते आयी हैं।

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