सांवैधानिक मूल्यों के प्रसार हेतु अनूठी घुमंतू पुस्तकालय यात्रा

शशांक शेखर:

26 नवंबर, का दिन पूरे देश के लिए किसी राष्ट्रीय उत्सव से कम नहींं होता, इस दिन भारत का संविधान अंगीकृत किया गया था। इस दिन को ध्यान में रख आरंभ युवा मंच के द्वारा एक यात्रा निकाली गई। 21 से 26 नवंबर, तक पूरे कोल्हान क्षेत्र के विभिन्न शिक्षण संस्थानों में घूम-घूम कर घुमंतू पुस्तकालय, प्रदर्शनी एवं कार्यशाला सत्र लिए गए। पुस्तकों के ज्ञान का संचार इन गतिविधियों का मुख्य आधार था। पुस्तकें व्यापक दृष्टिकोण बनाने में एक महत्वपूर्ण साधन हैं, जिससे इतिहास, विज्ञान, मानवीय मूल्यों से लबरेज़ कहानियों और अपने राज्य, देश और विश्व की सर्वश्रेष्ठ सांस्कृतिक विरासत को समझने में मदद मिलती है। 

लेकिन मोबाइल और इंटरनेट के युग में किताब पढ़ने की रुचि में लगातार गिरावट देखी जा रही है। पढ़ने के अभाव में युवा गलत सूचनाओं को ग्रहण करते हैं और तर्कशीलता, वैज्ञानिक सोच को नहीं अपना पाते। देश-दुनिया में बढ़ते सामाजिक अलगाव, धार्मिक कट्टरवाद, आर्थिक असमानता के बीच आज पढ़ने-लिखने की आवश्यकता पहले से ज़्यादा है ताकि एक सृजनशील, संवेदनशील, मानवीय, वैज्ञानिक सोच से लैस समाज का निर्माण हो सके। बेहतर समाज बनाने का सफ़र बहुत लम्बा है, लेकिन लगातार रचनात्मक काम करने की आवश्यकता हैं ताकि संवाद की प्रक्रिया रुके नहींं और इसी क्रम में इस यात्रा की शुरुआत 21 नवंबर को की गई। 

21-11-2022 यात्रा का पहला दिन 

“घूमंतु पुस्तकालय यात्रा” की शुरुआत सरायकेला खरसावां के प्रखंड गम्हारिया के राज्य संपोषित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में हुई। सांवैधानिक मूल्यों पर विद्यार्थियों ने काफ़ी अभिरुचि दिखाते हुए स्टॉल पर लगाई गई पुस्तकों का अध्ययन किया और अपने अनुभव साझा किए। विद्यालय के प्रधानाध्यापक मिठाई लाल यादव, सहायक शिक्षक अनिल कुमार सिंह व अन्य शिक्षकों की मौजूदगी में सुबह दस बजे पुस्तकालय की शुरूआत की गई। 

विशेष रूप से नौवीं, दसवीं, ग्यारहवीं और बारहवीं के छात्र छात्राओं ने अपनी-अपनी पसंद की पुस्तक ली और उनका अध्ययन किया। बाद में उन पुस्तकों के विषय-वस्तु से संबंधित चर्चा में उन्होंने भाग लिया। बारहवीं कक्षा में छात्र-छात्राओं के बीच संविधान की उद्देशिका का सामूहिक पाठ किया गया।

22-11-2022 यात्रा का दूसरा दिन 

भारत के संविधान में समाहित मूल्यों के प्रचार-प्रसार हेतु कोल्हान क्षेत्र के पूर्वी सिंहभूम, जमशेदपुर के बाराद्वारी स्थित पीपुल्स एकेडमी (10)+2 विद्यालय परिसर में घूमंतु पुस्तकालय यात्रा पहुँची। इस यात्रा में विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने काफ़ी दिलचस्पी दिखाई, विभिन्न पुस्तकों का अध्ययन किया और विषय वस्तु के बारे में संवाद किया। विद्यालय के प्राचार्य चंद्रदीप पांडेय एवं सहायक शिक्षक-शिक्षिकाओं के द्वारा पुस्तकालय की विधिवत् शुरूआत की गई। संविधान के विषय में जानकारी भी दी गई। कई सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित पोस्टर्स प्रदर्शित किए गए। कलाकार साथी प्रदीप ने अपने हुनर का इस्तेमाल करते हुए पोस्टर पर संविधान से जुड़े नारों को उकेरा।

इसी क्रम में एक विशेष संवाद सत्र आयोजित कर छात्र-छात्राओं के साथ पुस्तकों में उल्लिखित विषय वस्तुओं पर चर्चा की गई। इस दौरान संविधान की उद्देशिका का सामूहिक पाठ भी किया गया। इसके बाद यात्रा में शामिल सदस्य अंकुर ने संविधान के मूल्यों की व्याख्या की। प्राचार्य चंद्रदेव पांडेय ने संविधान की चर्चा करते हुए “आरंभ युवा मंच” का इस आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

23-11-2022 यात्रा का तीसरा दिन 

सांवैधानिक मूल्यों के प्रसार हेतु कोल्हान क्षेत्र के घाटशिला कॉलेज पहुंची, जहाँ पिछले दो दिनों से चल रही यात्रा को और भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला। पहले कॉलेज के प्राचार्य डॉ. आर.के. चौधरी, राजनीति शास्त्र के प्राध्यापक प्रो. इंदल पासवान और अन्य शिक्षकों एवं शिक्षाकेत्तर कर्मियों की उपस्थिति में विधिवत् पुस्तकालय का शुभारंभ किया। घूमंतु पुस्तकालय यात्रा के दौरान कॉलेज के तमाम छात्र-छात्राओं ने लगभग हज़ार से अधिक की संख्या में पुस्तकालय का अवलोकन किया और अपना ज्ञानवर्धन किया। 

अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य समेत तमाम प्राध्यापकों, कर्मियों तथा छात्र-छात्राओं की मौजूदगी में संविधान की उद्देशिका का सामूहिक पाठ किया गया। उसके बाद आरंभ युवा मंच की तरफ़ से कॉलेज को संविधान की उद्देशिका (फ्रेम सहित) भेंट की गई।

24-11-2022 यात्रा का चौथा दिन 

यात्रा के चौथे दिन “घूमंतु पुस्तकालय यात्रा” टेल्को क्षेत्र के अन्तर्गत गरूड़बासा स्थित मानव विकास स्कूल पहुँची, जहाँ के बच्चों ने गहरी रुचि दिखाते हुए स्टॉल में लगी पुस्तकों का अवलोकन एवं अध्ययन किया। इससे पहले विद्यालय की प्रिंसिपल समेत तमाम अध्यापकों की उपस्थिति में पुस्तकालय का विधिवत् शुभारंभ किया गया। आरंभ युवा मंच के तत्वाधान में संचालित पुस्तकालय यात्रा के दौरान वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं जन मुक्ति संघर्ष वाहिनी के वरिष्ठ सदस्य मंथन, जगत, झारखंड जनतांत्रिक महासभा के दीपक रंजीत, अजीत तिर्की, कृष्णा लोहार, रंगकर्मी विक्रम झा, निर्मल आदि मौजूद रहे और पुस्तकालय यात्रा को आने वाले समय में प्रभावकारी पहल की संज्ञा देते हुए पंचायत स्तर तक स्थाई पुस्तकालय स्थापित किए जाने की ज़रूरत पर बल दिया। मंथन जी ने कहा कि बच्चों में कैसी पुस्तकों को पढ़ने में ज़्यादा रुचि है, इसे ध्यान में रखते हुए उन्हें वैसी पुस्तकें मुहैया कराई जाएं।

विद्यालय की प्रिंसिपल ने कहा कि घूमंतु पुस्तकालय यात्रा से समाज में बहुत ही अच्छा संदेश जा रहा है। लोग किताबें पढ़ने के लिए पुनः आग्रही होंगे। अंत में एक संवाद सत्र चला, जब विद्यालय के बच्चों के साथ पुस्तकों की विषय वस्तु पर चर्चा की गई। साथ ही सांवैधानिक मूल्यों की व्याख्या की गई और विद्यालय परिवार को संविधान की उद्देशिका (फ्रेम सहित) भेंट की गई। संविधान की उद्देशिका का पाठकर यात्रा अपने अगले गंतव्य को निकल गई।

25-11-2022 यात्रा का पाँचवाँ दिन  

विभिन्न शिक्षण संस्थानों का सफ़र तय करते हुए यह यात्रा कोल्हान क्षेत्र के पश्चिमी सिंहभूम के टाटा कॉलेज, चाईबासा पहुंची, जहाँ कॉलेज प्रबंधन द्वारा संकल्प पट पर हस्ताक्षर के साथ इसका विधिवत् शुभारंभ किया गया। जहाँ सुबह दस बजे से अपराह्न तीन बजे तक लगे स्टॉल में कालेज के छात्र-छात्राओं ने पुस्तकों का अवलोकन और अध्ययन किया। उसके बाद कई छात्र-छात्राओं ने पुस्तकों की विषय-वस्तु पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दी। 

उपायुक्त को भेंट स्वरूप दी गई संविधान की उद्देशिका, ज़िला समाहरणालय में उपायुक्त अनन्य मित्तल को घुमंतू पुस्तकालय यात्रा के उद्देश्यों की उनको जानकारी देते हुए बताया कि इस यात्रा का मूल उद्देश्यों सोशल मीडिया एवं अन्य ज़रियों से फैलाए जा रहे नफरत भरे भाषणों को रोकने का प्रयास करना है। उपयुक्त ने यात्रा और यात्रियों की काफी सराहना की और आज के समय में इस यात्रा को उपयोगी बताया। संविधान की उद्देशिका (फ्रेम सहित) भेंट स्वरूप दी गई ।

26-11-2022 यात्रा का छठा व अंतिम दिन  

संविधान दिवस से पूर्व से चल रही यात्रा अपने अंतिम पड़ाव में घुमंतू पुस्तकालय यात्रा के छठे दिन कोल्हान के लाल बहादुर शास्त्री मेमोरियल महाविद्यालय, करणडीह (जमशेदपुर) में पुस्तकों का स्टॉल लगा, जहाँ सुबह दस बजे से ही कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने विभिन्न पुस्तकों का अवलोकन एवं अध्ययन किया और विषय वस्तु से संबंधित चर्चा में भाग लिया।

इस अवसर पर विशेष रूप से कॉलेज के वर्चुअल रूम में संविधान दिवस संविधान सभा का आयोजन कर विशेष व्याख्यान सत्र का चलाया, जिसमें मुख्या वक्ता के रूप में जाने माने शिक्षाविद, समाजसेवी और लेखक डॉ। सुखचन्द्र झा ने स्वाधीनता आंदोलन से लेकर देश की आज़ादी एवं संविधान लागू होने तक के सफ़र के बारे में व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि संविधान देश के नागरिकों के तमाम अधिकारों की रक्षा करता है, अतः इसके मूल्यों की गहरी समझ सभी को होनी चाहिए। देश का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक उत्थान संविधान से ही संभव है। 

हेट स्पीच पर अंकुश ज़रूरी – अंकुर शास्वत 

सत्र में आरंभ युवा मंच के अंकुर शास्वत ने कहा कि देश में कुछ अरसे से हेट स्पीच बढ़ गई है, जिसके कारण सांप्रदायिक माहौल खराब होने लगा है। इस पर नियंत्रण की महती आवश्यकता है। और युवा इस क्रम में ज़्यादा शामिल हो रहे है जो की कही से भी ठीक नहींं है बिना जाने समझे किसी भी मैसेज, वीडियो, पोस्टर को फैलाते है, बिना उसकी सत्यता जाने वो आग से भी ज़्यादा तेजी से फ़ैल जाता है जो की आने वाले नूतन पीढ़ी के लिए घातक है। 

इसी क्रम में कॉलेज परिसर में संकल्प पट पर छात्र छात्राओं और प्राध्यापकों ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ किया गया। इस अवसर पर कॉलेज को संविधान की उद्देशिका (फ्रेम सहित) भेंट स्वरूप दी गई।

कॉलेज के प्रो. बिनोद कुमार, डॉ. विजय प्रकाश, डॉ. पी के गुप्ता, प्रो. नोद कुमार, प्रो. ऋतू, चंदन जायसवाल, अनिमेष बख्शी, (फैकल्टी) समेत अन्य कर्मी और अनेकानेक छात्र छात्राएं उपस्थित रहे।

वरिष्ठ पत्रकार और वैज्ञानिक चेतना के संयोजक डी.एन.एस. आनंद और वरिष्ठ रंगकर्मी जीतराय हाँसदा भी जुड़े और इस अभियान से जुड़े सदस्यों का उत्साहवर्धन किया।

इस पुरे यात्रा क्रम में विशेष से सहयोग इन संस्थाओ का रहा –

जिनमें डॉ. सुखचंद्र झा एवं अरविंद अंजुम-गांधी शान्ति प्रतिष्ठान, अर्पिता श्रीवास्तव-भारतीय जन नाट्य संघ, दीपक रंजीत-झारखंड जनतांत्रिक महासभा, डॉ. आशुतोष कुमार झा-कलाधारा, मंथन-जन मुक्ति संघर्ष वाहिनी और एस.वी. रामन मूर्ति शामिल हैं।

इस पूरी यात्रा को चलाने, सजाने, सवारने एवं इसके सफल संचालन में मुख्य रूप से विकाश कुमार, अंकुर शास्वत, प्रियाँक प्रभात, शशांक शेखर और प्रदीप रजक का उल्लेखनीय तथा बहुमूल्य योगदान रहा।

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