युवानिया डेस्क:

26 नवंबर को देशभर में संविधान दिवस मनाया गया। मौजूदा परिस्थितियों में ये दिन पिछले किसी भी समय से ज़्यादा महत्वपूर्ण है जब लोगों और समुदायों के बीच के फासले बढ़ रहे हैं। बोलने-सोचने की आज़ादी से लेकर किसके साथ रहना है या नहीं रहना है जैसे बुनियादी अधिकारों के हनन के किस्से बहुत आम होते जा रहे हैं। भारत के नागरिकों के इन मूल अधिकारों और विविधताओं के देश भारत की एकता बनाए रखने के लिए संविधान के मौजूदा स्वरूप को बचाए रखना आज एक बड़ी ज़रूरत है। इस मुद्दे को केंद्र में रखकर दिल्ली की संस्था श्रुति द्वारा एक कार्यशाला का आयोजन इस साल की शुरुआत में नागपुर में किया गया था। कार्यशाला के दौरान ढेंकानल ओडिशा के साथी अमूल्य नायक ने सभी के समक्ष संविधान पर एक सुंदर गीत प्रस्तुत किया जो संविदान की ज़रूरत और उसकी खूबियों को बड़ी ही खूबसूरती से बयां करता है। आइये आनंद लेते इस सुंदर गीत का:

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