कड़े संघर्ष के बाद पढ़ाई करने वाली फैज़ाबाद की बबली अब चलाती हैं महिलाओं के लिए प्रशिक्षण केंद्र

बबली प्रजापति:

आयु: 26 वर्ष
शैक्षिक योग्यता: नागरिक शास्त्र और समाजशास्त्र में स्नातक

बबली एक हाशिए के परिवार से आती है, उसने अपने जीवन में कई चुनौतियों का सामना किया और अपनी पढ़ाई के दौरान मुख्यधारा के समाज से भेदभाव का सामना किया। 

मेरे परिवार में 7 बहनें और 1 भाई हैं। मैंने एक सरकारी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की है। 8वीं तक मैंने प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाई की जहाँ मुझे काफ़ी परेशानी उठानी पड़ी, क्यूंकि 7 बहनें होने की वजह से सब को स्कूल भेजना बहुत ज़्यादा मुश्किल था। मेरे पिताजी घर में कमाने वाले एकमात्र व्यक्ति थे और परिवार बहुत बड़ा था। लेकिन किसी की शिक्षा रुकी नहीं, जिसको जितना पढ़ने का मन था उतनी सभी ने पढ़ाई की। मेरी बड़ी दीदी ने केवल 5वीं तक पढ़ाई की और स्कूल छोड़ दिया क्यूंकि आगे पढ़ने वाले 6 लोग और थे। इसी तरह मेरी दो और दीदियों ने भी पढ़ाई छोड़ दी। स्कूल जाने वाली अब हम 4 बहनें बची थी, हम चारों ने ही अपनी पढ़ाई नहीं रोकी। किसी भी तरह पढ़ाई को जारी रखा। स्कूल जाते वक़्त पैर में जूते भी नहीं रहते, न तो ड्रेस/यूनिफार्म होती थी। किताबें भी हम एक-दूसरे से लेकर पढ़ते थे। इसी तरह इंटर तक की पढ़ाई कम्पलीट की। आगे की पढ़ाई के लिए पैसा नहीं था और मेरी मम्मी की तबियत भी ख़राब थी, डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए बोला था। मम्मी मुझे ज़्यादा प्यारी थी, न की पढ़ाई, लेकिन आगे पढ़ने का भी मन था। करते भी क्या हम, मेरे पास एडमिशन कराने के लिए पैसे नहीं थे। उस समय घर पर काफ़ी मेहमानों का आना-जाना भी लगा रहता था, क्यूंकि मम्मी का ऑपरेशन हुआ था। 

एक दिन अचानक मेरी दीदी ने मुझ से पूछा कि पढ़ाई कर रही हो या नहीं, तो मैंने उसे बताया कि एडमिशन कराने के लिए पैसे नहीं हैं। फिर उसने मुझसे पूछा, कितना खर्च होगा फीस का? पूरे साल की फीस 4 हज़ार रूपए है, जब मैंने उसे यह बताया तो उसने मुझे तुरंत 1 हज़ार रूपए दिए और बोला जाकर एडमिशन करवा लो, बाकी पैसे कुछ टाइम बाद दे देंगे। इस तरह 2016 में मैंने अपनी बी.ए. तक की पढ़ाई पूरी की। मैंने उसके आगे पढ़ाई नहीं की क्यूंकि घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी।

घर की ज़रूरतें पूरा करने के लिए मैंने काम करना शुरू किया। मैंने किशोरियों को सिलाई का प्रशिक्षण देना शुरू किया और साथ में बुटीक का काम करने लगी। धीरे-धीरे घर की स्थिति थोड़ी अच्छी होने ही लगी ही कि अचानक मेरे पिता की उनके साथी व्यवसायी ने हत्या कर दी। हम लोगों को 4-5 दिन बाद पता चला कि पापा का मर्डर हो गया है, उनकी बॉडी सीतापुर ज़िले में मिली थी। घर की स्थिति चाहे जैसी भी थी लेकिन हमारा परिवार एक साथ खुश था, इस घटना के बाद हमारा पूरा परिवार एकदम से टूट सा गया। इस घटना के बाद मैंने अपने परिवार के साथ न्याय पाने के लिए कड़ा संघर्ष किया। मेरे भाई को दोषियों से लगातार धमकियां मिलने के कारण वह दूसरे शहर में चला गया, पर मैंने भागने से इनकार कर दिया। पापा के अचानक चले जाने के बाद घर चलाने की पूरी ज़िम्मेदारी मेरे ऊपर आ गई। 

मैं डटी रही। मैंने शादी नहीं की और अपनी छोटी बहन की शादी की ज़िम्मेदारी भी अपने ऊपर ली, साथ ही भाई की पढ़ाई को भी जारी रखा। मैंने अपने स्वयं के प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए। मेरा मानना ​​​​है कि पितृसत्तात्मक और पुरुष प्रधान समाज, लड़कियों के उत्पीड़न के एक लंबे इतिहास का कारण रहा है, इस स्थिति को बदलने के लिए सभी महिलाओं और लड़कियों को आर्थिक सशक्तिकरण प्राप्त करने की आवश्यकता है। वर्तमान में मैं 60 किशोरियों को शिक्षा और कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान कर रही हूँ। वर्ष 2020 में मैंने 150 महिलाओं को प्रशिक्षित किया, जो अब आत्मनिर्भर हैं और अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पैसे कमा रही हैं। मुझे अवध पीपुल्स फोरम द्वारा अग्रणी महिला उद्यमी के रूप में चुना गया था और मैं सहर फैलोशिप की पहली बैच की फेलो भी थी। वर्तमान में, मैंने तीन केंद्र विकसित किए हैं और उसके प्रशिक्षु सदस्य अब प्रशिक्षक के रूप में विकसित हो गई हैं और हाशिए के समुदाय की लड़कियों को उचित अवसर और प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए अथक प्रयास कर रही हैं।

Author

  • बबली, उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद की युवा कार्यकर्ता हैं जो सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हैं। पितृसत्तात्मक और पुरुष-नेतृत्व वाले समाजों को बदलने के लिए सभी महिलाओं और लड़कियों को आर्थिक सशक्तिकरण प्राप्त करने की आवश्यकता है का विचार रखती बबली ने महिलाओं को सिलाई-कढाई के काम सिखाने के लिए तीन प्रशिक्षण केंद्र खोले हैं जहाँ 60 से ज़्यादा महिलाओं को वो वर्तमान में प्रशिक्षण दे रही हैं। बबली साथ ही अवध पीपलस फोरम के साथ जुड़ कर महिलाओं के हक़-अधिकारों पर भी काम करती हैं।

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