युवानिया टीम:

देवेन्द्र भाई की बातचीत पर आधारित –

राजस्थान के बारे में सबसे पहले जो मन में चित्र आते हैं, वो रेत के टीलों के, और ऊंटों के होते हैं। पुस्तकों में यही मुख्य बात लिखी होती है राजस्थान के बारे में, और पिक्चरों में भी यही दिखाया जाता है। लेकिन राजस्थान के झालावाड़ ज़िले के झिरी गाँव में पहुंच कर आप पाठ्य पुस्तक वाले राजस्थान में हो, ऐसा आपको लगेगा ही नहीं।

झिरी में पहुंचे विभिन्न राज्यों के सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच वैज्ञानिक सोच और रूढ़िवादी सोच के विषय पर कार्यशाला चल रही थी। इसी सिलसिले में ‘हम किसान संगठन’ के देवेंद्र भाई ने बताया कि उनके संगठन ने कई सालों तक अंधविश्वास दूर करने के लिए नाटक के माध्यम से लोगों को समझाने की कोशिश की।

पहले उनके गाँव में किसी को भी जब साँप काटता था तो उसे गाँव के भैरो जी मंदिर पर ले जाते थे। वहाँ उसे लिटा कर झाड़-फूँक करते थे। इस इलाके में ज़हरीले साँप भी हैं। बहुत से लोगों की साँप के काटने से मृत्यु हो जाती थी। ‘हम किसान संगठन’ के साथियों ने नाटक के माध्यम से लोगों को समझाया कि साँप के काटने पर अस्पताल ले जाकर सर्पदंश का इंजेक्शन लगवाना और इलाज करवाना क्यों ज़रूरी है। एक बार तो एक गाँव में नाटक टीम को धौंस-धमकी देकर भगा ही दिया। लोगों को अच्छा नहीं लगता था कि उनके देवताओं और परंपराओं के खिलाफ़ बोला जा रहा है। इन धमकियों के बावजूद जब हम किसान संगठन ने वैज्ञानिक चेतना बढ़ाने की अपनी मुहीम को जारी रखा तो नाटक टीम के खिलाफ धार्मिक भावनाएं भड़काने और देशद्रोह के मामलों में केस भी दर्ज करवाए गए जो कि बाद में खारिज हो गए।

लेकिन धीरे-धीरे इनकी बातें सुनकर एक-दो लोग अस्पताल गए और ठीक हो गए तो यह बात फैल गई। आज अधिकतर लोग साँप काटने पर देवी देवता के भरोसे नहीं बैठते, और रोगी को तुरंत अस्पताल ले जाते हैं। खुशी की बात यह है कि पिछले बीस सालों में झिरी गाँव में सर्पदंश से एक भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं हुई है।

फीचर्ड फोटो आभार: फ्लिकर

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