आदिवासी_मोटीवेशन:

यह कहानी/ विडीयो  इंदौर, गुना में आदिवासियों पर हुऐ अत्याचार से सबक सीखने और संगठित होने का आव्हान करता है।

हिन्दी अनुवाद: 

एक किसान के घर में एक मुर्गा, एक बकरा, एक कबूतर और एक चूहा रहते थे। एक दिन चूहे ने देखा कि किसान एक पिंजरा लाया है चूहा पकड़ने के लिए। चूहा बहुत चिंतित हो गया और उसने यह बात कबूतर को बताई। कबूतर ने उसके मजे लेते हुए कहा कि मैं तो इस पिंजरे में फंसना नहीं चाहता, चूहा पकड़ने के पिंजरे से मुझे क्या लेना-देना है। फिर चूहे ने यही बात मुर्गे से जाकर कही कि मुर्गे-मुर्गे मुझे पकड़ने के लिए किसान एक पिंजरा लाया है, कुछ मेरी मदद कर। मुर्गा भी हंसने लगा और उसने चूहे की कुछ मदद नहीं करी, उसने कहा तू जाने तेरा काम जाने। फिर चूहे ने यह बात बकरे को बताई, बकरे ने भी उसके खूब मजे लिए और हँस-हँस के बोला कि भाई मेरा तो एक पैर भी इस पिंजड़े में नहीं फंसेगा तू बच के रहना।

किसान ने चूहा पकड़ने के लिए उस पिंजरा को खोल कर उसमें रोटी लगा कर रख दिया। अंधेरे में उस पिंजड़े में एक जहरीला साँप घुस गया। साँप जब अंदर हिला तो पिंजरा खड़खड़ करने लगा। किसान की पत्नी ने सोते-सोते सुना और उसने पिंजरा पकड़ने के लिए जैसे ही हाथ आगे बढ़ाया, साँप ने उसे काट लिया। अब किसान रातों-रात अपनी पत्नी को एक दवाई देने वाले के पास लेकर गया। उसने कुछ जड़ी बूटी दी झाड़-फूंक करी और बोला कि अगर इसे कबूतर का मांस खिलाओगे तब यह बस शायद बच जाएगी।

घर जाकर किसान ने उस कबूतर को मार दिया और उसका मांस अपनी पत्नी को खिलाया। जैसे ही यह खबर कि उस महिला को साँप ने काट लिया है, उसके रिश्तेदारों में फैली तो एक-एक करके उसके रिश्तेदार उसका हाल-चाल पूछने के लिए घर आने लगे। अब रिश्तेदार जब मेहमान की तरह हाल-चाल लेने घर आए तो किसान ने उन सबको खुश करने के लिए मुर्गा काट दिया और मुर्गे का मांस खिला दिया। थोड़े दिनों में धीरे-धीरे किसान की पत्नी ठीक हो गई तो सब लोग बहुत खुश हुए। किसान ने भी कई तरह की जो मन्नतें मांगी थी वह पूरी हो गई तो किसान ने सोचा कि अब मैं पूरे गांव को बुलाकर बकरा खिला देता हूं और उसने बकरा काट के पूरे गांव को खिला दिया। जब चूहे ने देखा कि मेरे पीछे कबूतर, मुर्गा और बकरा सब मर गए तो चूहा घर छोड़कर जंगल में भाग गया।

तो कहानी का अर्थ यह है कि जब किसी एक की मुसीबत आती है तो दूसरे लोग हंसते हैं और कुछ मदद नहीं करते, लेकिन धीरे-धीरे सब लोग फँस जाते हैं।

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