गोपाल पटेल:
मैं वृक्ष हूँ, इस माटी का x2
जो मुझे सींच कर रखती है।
मैं वृक्ष हूँ इस माटी का
जो मुझे जीवन देती है।
मैं वृक्ष हूँ, इस संसार का
मैं धरा पर प्राणवायु प्रवाहित करता हूँ।
मैं वृक्ष हूँ इस माटी का।
मैं वृक्ष हूँ, इस धरा का
मुझे संवार लो, इंसान।
मैं ज़िंदगी को उजियारा देता हूँ।
मुझे संवार लो, इंसान।
मैं वृक्ष हूँ, इस कायनात का
जग को हरा-भरा रखता हूँ।
मैं लोगों को, औषधि गुणों से युक्त रखता हूँ।
यही मेरी पहचान है, यही मेरा संसार है।
मैं वृक्ष हूँ, इस संसार का
मैं वृक्ष हूँ, इस धरा का
मैं वृक्ष हूँ, इस माटी का
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View all postsगोपाल, मध्य प्रदेश के बड़वानी ज़िले से हैं। वर्तमान में वे कलाम फाउंडेशन से जुड़कर लोगों की मदद कर रहे हैं। साथ में गोपाल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहें हैं।

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