ସମ୍ବିଧାନ ଗୀତ | संविधान गीत

ଲୋଚନ ବରିହା (लोचन बरिहा):

ଶୁନ ଶୁନ ମାଁ ବହେନ ଦଦା ଭାଇ ଶୁନ।
ଚଲୁଛେ ଭାରତେ ଆମର ଭାରତୀୟ ସମ୍ବିଧାନ।।
ସର୍ବଭୌମ୍ୟ ଗଣରାଜ୍ୟ ଭାଇ ରେ ଲୋକଙ୍କ ସାଶନ।।
ଇଟା ସୋର ରଖି ଥା ରେ
ଘରେ ଘରେ ପହଁଚେଇ ଦେମା
ସତେତ ସମ୍ବିଧାନ ର ଖାତା
ଇଟା ସୋର ରଖି ଥା ରେ।। 1।।

ତିନିଶହ ପଂଚାନବେ ଧାରା ସଂବିଧାନ।
ଚଉଦରୁ ଉନେଇଶି ଧାରା ମୌଳିକ ନିୟମ।
ନାଇ ମିଲୁଛେ ହକ୍ ଅଧୀକାର ଭାଇ ରେ
ହେଉଛେ ଉଲଘଂନ।
ଏକତା ହେଇ ଶପଥ ନେମାଳ ଭାଇ ରେ ସମସ୍ତେ ସମାନ।
ଇଟା ସୋର ରଖି ଥା ରେ
ଘରେ ଘରେ ପହଁଚେଇ ଦେମା
ସତେତ ସମ୍ବିଧାନ ର ଖାତା।। 2।।

ସାମାଜିକ, ଆର୍ଥିକ, ନ୍ଯାୟ, ରାଜନୀତି
ବିଶ୍ବାସ, ବିଚାର, ଧର୍ମ ଆରୁ ଅଭିବ୍ୟକ୍ତି
ପୂଜାର୍ଚନା, ଉପାସନା ଭାଇ ରେ
ସଂବିଧାନ ର କ୍ଷାତି।
ଇଟା ସୋର ରଖି ଥା ରେ।
ଘରେ ଘରେ ପହଁଚେଇ ଦେମା
ସତେତ ସଂବିଧାନର ଖାତା।
ଇଟା ସୋର ରଖି ଥା ରେ।।
ଭାଇଚାରା ଅଖଣ୍ଡତା ସତେତ ନିତି ସ୍ୱାଧୀନତା।
ଇଟା ସୋର ରଖି ଥା ରେ।
ଘରେ ଘରେ ପହଁଚେଇ ଦେମା
ସତେତ ସଂବିଧାନର ଖାତା
ଇଟା ସୋର ରଖି ଥା ରେ।। 3।।

ज़िंदाबाद संगठन की बैठक में अपना लिखा गीत गाते हुए लोचन बरिहा।

हिंदी अनुवाद – (आभार: डोलामणि वनछैर)

सुनो-सुनो माँ, बहन, दादा, भाई सुनो;

चल रहा भारत में हमारा भारतीय संविधान।

सर्वभौम गणराज्य भाई रे, लोगो का शासन;

ये याद रख।

घर-घर में भेजे देंगे संविधान की कॉपी;

ये याद रखना भाई।

तीन सौ पिचानबे अनुच्छेदों वाला संविधान;

और मौलिक अधिकार।

नहीं मिल रहा हैं हक़-अधिकार, भाई हो रहा है उल्लंघन;

एक होकर शपथ लेंगे भाई, हम सब लोग समान।

ये याद रखना;

हर घर में पहुंचा देंगे, संविधान का खाता।

सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक न्याय;

विश्वास, विचार, धर्म और अभिव्यक्ति;

पूजा, अर्चना, उपासना की आज़ादी, से है भाई संविधान की ख्याति। 

ये याद रखना;

हर घर पर पहुंचाओ संविधान की कॉपी;

ये याद रखना।

भाईचारा, अखंडता, सब दिन स्वाधीनता;

ये याद रखना, हर घर में पहुंचा देंगे।

संविधान की खाता;

ये याद रखना।

Author

  • लोचन, ओडिशा के बलांगीर ज़िले से हैं और सामाजिक परिवर्तन शाला से जुड़ी हैं। वह ज़िन्दाबाद संगठन के साथ जुड़कर स्थानीय मुद्दों पर काम कर रहे हैं।

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