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मंदिर-मस्जिद-गिरजाघर ने बाँट लिया भगवान को

कविता के लेखक – विनय महाजन :

मंदिर-मस्जिद-गिरजाघर ने बाँट लिया भगवान को,
धरती बांटी, सागर बांटा, मत बांटो इंसान को. मंदिर-मस्जिद…

हिन्दू कहता मंदिर मेरा, मंदिर मेरा धाम है,
मुस्लिम कहता मक्का मेरा अल्लाह का इमान है.
दोनों लड़ते, लड़ लड़ मरते, लड़ते लड़ते ख़तम हुए.
दोनों ने एक दूजे पर न जाने क्या क्या ज़ुल्म किये.
किसका ये मकसद है, किसकी चाल है ये जान लो,
धरती बांटी, सागर बांटा, मत बांटो इन्सान को. मंदिर-मस्जिद..

नेता ने सत्ता की खातिर कौमवाद से काम लिया,
धरम के ठेकेदार से मिलकर लोगों को नाकाम किया,
भाई बंटे टुकड़े-टुकड़े में, नेता का ईमान बढ़ा,
वोट मिले और नेता जीता शोषण को आधार मिला.
वक़्त नहीं बीता है अब भी, वक़्त की कीमत जान लो.
धरती बांटी, सागर बांटा, मत बांटो इंसान को. मंदिर-मस्जिद…

प्रजातंत्र में प्रजा को लूटे ये कैसी सरकार है,
लाठी गोली ईश्वर अल्लाह ये सारे हथियार हैं,
इनसे बचो और बच के रहो और लड़कर इनसे जीत लो,
हक है तुम्हारा चैन से रहना अपने हक को छीन लो,
अगर हो तुम शैतानी से तंग, ख़त्म करो शैतान को,
धरती बांटी, सागर बांटा, मत बांटो इंसान को. मंदिर-मस्जिद….


मुल्क में हैं आवाजें दो

कविता के लेखक – जावेद अख्तर:

एक हमारी और एक उनकी
मुल्क में हैं आवाजें दो
अब तुम पर है कौन सी तुम
आवाज सुनों तुम क्या मानो

हम कहते हैं जात धर्म से
इन्सा की पहचान गलत
वो कहते हैं सारे इंसा
एक हैं यह एलान गलत

हम कहते हैं नफरत का
जो हुक्म दे वो फरमान गलत
वो कहते हैं ये मानो तो
सारा हिन्दुस्तान गलत.

हम कहते हैं भूल के नफरत,
प्यार की कोई बात करो…
वो कहते है खून खराबा
होता है तो होने दो.

एक हमारी और एक उनकी
मुल्क में हैं आवाजें दो.
अब तुम पर है कौन सी तुम
आवाज सुनो तुम क्या मानो.

हम कहते हैं इंसानों में
इंसानों से प्यार रहे
वो कहते है हाथों मे
त्रिशूल रहे तलवार रहे.

हम कहते हैं बेघर बेदर
लोगों को आबाद करो
वो कहते हैं भूले बिसरे
मंदिर मस्जिद याद करो

एक हमारी और एक उनकी
मुल्क में हैं आवाजें दो
अब तुम पर है कौन सी तुम
आवाज सुनो तुम क्या मानो

फीचर्ड फोटो आभार: न्यूज़कर्नाटक

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One response to “देश में धार्मिक उन्माद के हालात बयान करते दो गीत”

  1. Dashrath Avatar
    Dashrath

    बहोत ही बेहतरीन अंक , पढके लिखणेको दिल चाहता है।

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