इम्यूनिटी या प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का प्रचार और उसकी वास्तविकता

डॉ नरेंद्र गुप्ता:

जब से विश्व और भारत में कोरोना रोग संक्रमण का आगमन हुआ है तब से उसके प्रकोप को कम करने और निदान के लिए भारत में अनेक तरह के घरेलू उपचार, औषधियां एवं क्रिया कलापों की चर्चा और प्रयोग किये जा रहे हैं। इनमें से अनेक औषधियां अथवा घरेलू उपचार उपयोगी साबित हो सकते हैं, तो अनेक उपचार ऐसे भी हैं जिनका रोग नियंत्रण या निदान में कोई उपयोग नहीं है। ऐसा भी संभव है कि कुछ घरेलू और देशी औषधियां आदि से लाभ के बजाय नुकसान ही हो जाए। रोग की भयावहता कम करने के लिए सबसे अधिक चर्चा और सेवन इम्यूनिटी बढ़ाने वाले पदार्थों का हो रहा है। भारत में बड़े स्तर पर इसका व्यापार कर लाभ कमाया जा रहा है। सबसे पहले यह समझ लेना चाहिए कि जिसे इम्यूनिटी कहा जा रहा है आखिर वह है क्या ?

1)- इम्यूनिटी क्या है?

इम्यूनिटी का शाब्दिक अर्थ है निष्प्रभाव। यहां इसका तात्पर्य शरीर में रोग के दुष्प्रभाव को रोकने की क्षमता जिसे रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कहा जाता है को बढ़ाना है, जिससे संक्रमण को निष्प्रभावित किया जा सके। इम्यूनिटी केवल संक्रामक रोग अर्थात जीवाणु, कीटाणु अथवा परजीवियों से होने वाले रोगों के लिए होती है। गैर संक्रामक रोग जैसे डायबिटीज़, उच्च रक्तचाप, मानसिक रोग के लिए कोई इम्यूनिटी नहीं होती है।

2)- कोरोना रोग के संदर्भ में इम्यूनिटी का क्या अर्थ है?

यहां इम्यूनिटी से तात्पर्य है कि शरीर में इतनी क्षमता हो कि वह कोविड-19 जीवाणु (वायरस) के प्रवेश को रोक सके या प्रवेश करने के बाद उसे बढ़ने नहीं दे और समाप्त कर दे।

3)- इम्यूनिटी शरीर में कहां विद्यमान होती है?

इम्यूनिटी का शरीर में कोई एक निश्चित स्थान नहीं है। यह शरीर में रक्त के माध्यम से हर अंग में हर समय उपलब्ध रहती है। इसका अर्थ यह हुआ कि इम्यूनिटी जिसे वैज्ञानिक भाषा में एन्टीबाॅडीज़ कहा जाता है, रक्त में ही होते हैं।

यह एन्टीबाॅडीज़ मोटे रूप से दो प्रकार के होते है- एक तो साधारण जो हमेशा रक्त में रहते हैं और किसी भी जीवाणु या कीटाणु के संक्रमण को सबसे पहले समाप्त करने का प्रयास करते हैं। दूसरे एन्टीबाॅडीज़ विशिष्ट होते हैं जो किसी जीवाणु अथवा कीटाणु के प्रवेश के बाद उसे नष्ट करने के लिए बनते हैं। यह एन्टीबाॅडीज़ खून में इसलिए होते हैं, क्यूंकि खून शरीर के हर छोटे से छोटे हिस्से तक पहुंचता है। 

उदाहरण के लिए आपके शरीर के किसी भी भाग में छोटे से छोटा घाव भी हो जाये तो खून निकलता है जो यह दर्शाता है कि यह सब जगह विद्यमान है और पूरे शरीर में चक्कर लगाता रहता है। रक्त का एक कार्य शरीर में हर अंग तक आवश्यक तत्व पहुंचाना है, जिनसे शरीर के सभी अंगो को उर्जा मिलती है और वे अपना कार्य करते रहते हैं। शरीर के किसी भी भाग में जो कोशिकाएं मृत हो जाती हैं, वह नयी बन जाती हैं। नई कोशिका बनाने के लिए जो आवश्यक तत्व चाहिए वह भी रक्त के माध्यम से ही शरीर के उस भाग तक पहुंचते हैं। शरीर के किसी भी हिस्से से जीवाणु/कीटाणु या परजीवी प्रवेश करे तो उस हिस्से में प्रवाहित रक्त में मौजूद एंटीबाॅडिज़ उसे रोकते हैं। 

4)- इम्यूनिटी कैसे बढ़ती है और कितनी बढ़ सकती है?

इम्यूनिटी का साधारण शब्दों में अर्थ है कि आपका शरीर तंदुरुस्त और रोगमुक्त हो। इसको बढ़ाने या बनाये रखने का एकमात्र तरीका है कि शरीर का वजन आयु और लम्बाई के जो मानक हैं उनके ना कम हो और ना ही अधिक हो। यह मानक महिला एवं पुरूषों में भिन्न-भिन्न हैं। वयस्कों में लम्बाई के अनुसार कितना वजन होना इसे जानने का एक सरल सा माध्यम यह है कि आपकी कमर की चौड़ाई आपकी लम्बाई से आधी होनी चाहिए। अगर यह अधिक है तो आप मोटे हैं और कम है तो आप कमज़ोर हैं।

किसी भी व्यक्ति को मानक वजन प्राप्त करने के लिए आवश्यक है कि उसे निरन्तर संतुलित एवं पर्याप्त आहार, आवश्यकतानुसार सुरक्षित जल एवं प्रदूषण रहित वायु उपलब्ध हो। यह तब ही संभव है जब आपके द्वारा सेवन किए जा रहे भोजन, जल और वायु, जीवाणु और कीटाणु मुक्त हों और आवश्यक मात्रा में निर्बाध उपलब्ध हों। इम्यूनिटी को बनाए रखने के लिए तनावमुक्त या चिंतामुक्त रहना भी आवश्यक है क्योंकि तनाव का रोग प्रतिरोधक क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। इसलिए तनाव की स्थिति से कैसे निजात पाया जाए यह जानना भी आवश्यक है। इसके लिए मनुष्य में जिज्ञासु प्रवृति एवं वैज्ञानिक सोच होनी चाहिए।

अगर आप संतुलित और पर्याप्त भोजन, स्वच्छ पेयजल, नियमित रूप से शारीरिक श्रम/व्यायाम एवं चिन्तामुक्त या चिन्ता होने पर उसके निवारण का सही इंतजाम कर लेते हैं तो आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता आवश्यकतानुसार बढ़ी रहेगी।

5)- बाज़ार में जो इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य और पेय पदार्थ बिक रहे हैं, उनसे क्या इम्यूनिटी बढ़ती है?

अगर कोई व्यक्ति स्वस्थ्य (रोग रहित) है और उसका वजन उसकी आयु, लम्बाई मानक के अनुसार है और वह किसी  गैर संक्रामक रोग सेे ग्रसित नहीं है तो फिर किसी भी अतिरिक्त खाद्य एवं पेय पदार्थ के सेवन से इम्यूनिटी नहीं बढ़ेगी, क्यूंकि अतिरिक्त इम्यूनिटी बढ़ाने जैसा कोई भी अभिज्ञान शरीर को नहीं होता है। इम्यूनिटी तब ही बढ़ती जब आपके शरीर में किसी पोषक तत्व की कमी होगी और इसकी आपूर्ति संतुलित भोजन एवं भरपेट भोजन से निरन्तर रूप से करते रहने से संभव है। इसके अतिरिक्त इम्यूनिटी बढ़ाने का अन्य कोई माध्यम नहीं है। इसलिए बाज़ार में इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य एवं पेय पदार्थों से इम्यूनिटी नहीं बढ़ती है। 

इन पदार्थों में दिये गए तथाकथित पौेष्टिक तत्व एक स्वस्थ्य व्यक्ति के शरीर में पहले से ही उपलब्ध होते हैं। इसलिए इनके उपयोग से जो तत्व शरीर में जाएगें, वह वापस मल-मूत्र के माध्यम से बाहर आ जाएगें। इन पदार्थों पर अनावश्यक राशि व्यय करने के स्थान पर उस राशि से संतुलित भोजन की सामग्री खरीदकर खायी जाए तो इम्यूनिटी को बनाए रखने में अधिक मदद मिलेगी।

6)- संतुलित भोजन क्या है?

उत्तर भारतीय भोजन परम्परा के अनुसार रोटी, सब्जी, दाल, दही, तेल, घी, चावल, दूध, हरी सब्जी एवं फल और निरामश भोजन (जो मांसाहारी है) संतुलित भोजन में सम्मलित है। आप अगर बिना रसायनिक खाद के उगाए गए फल, सब्जी और अन्न का सेवन करेंगे तो शरीर में इनसे प्राप्त होने वाली उर्जा एवं अन्य तत्व, रसायनिक खाद से उत्पन्न पदार्थो से अधिक लाभकारी होंगे।

7)- देशी पद्वति के अनुसार बनाये पदार्थ एवं पेय क्या इम्यूनिटी बढ़ाते हैं?

इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए किसी भी पद्वति से बनाये गये विशेष पदार्थ या पेय का उपयोग केवल रोगग्रस्त व्यक्ति जिनका वजन उनकी आयु एवं लम्बाई के अनुपात में कम हो गया है, के लिए लाभकारी हो सकता है। इसलिए बेहतर यही होगा कि स्वस्थ व्यक्ति अनावश्यक रूप से किसी भ्रामक प्रचार के कारण इम्यूनिटी बढ़ाने का दावा करने वाले पदार्थो एवं पेय का उपयोग नहीं करें। इनके उपयोग से लाभ के स्थान पर हानि भी हो सकती है। जैसे मसालों से भरा पेय के पीने से आमाशय में जलन, घाव, बवासीर और कब्ज़ जैसे रोग हो सकते हैं। अनेक स्थानीय स्तर पर बनाये गये पेय में जिन पदार्थो का उपयोग किया जाता है वे कीटाणु अथवा जीवाणु रहित नहीं होने से भी हानि पहुंचा सकते हैं।

इम्यूनिटी बढ़ाने अथवा बनाये रखने के चार मंत्र:

1)- प्रतिदिन पर्याप्त एवं संतुलित भोजन का सेवन।

2)- पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित एवं स्वच्छ पेयजल का उपयोग। 

3)- मध्यम स्तर का शारीरिक श्रम/व्यायाम/योग।

4)- तनाव मुक्त यानि कि तनाव का बेहतर प्रबन्धन कर उससे मुक्ति।

फीचर्ड फोटो आभार: गूगल

Author

  • डा. नरेन्द्र गुप्ता पिछले 4० से अधिक सालों से स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम कर रहे हैं और जाने माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

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