संजीव कुमार: अगर रुकूँ तो जाऊं कहाँ, अगर रुकों तो जाओं कहाँमेरे यूँ रुक जाने से, यूँ थक बैठ जाने… READ MORE
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विनीत काण्डपाल : सत्यनारायण व्यास जी की आत्मकथा ‘क्या कहूं आज’ उनके संघर्ष की कथा है। ऐसा अनवरत संघर्ष जिसने… READ MORE
महिपाल मोहन : उत्तराखंड के वन गुज्जर का इतिहास– आज अगर हम मनुष्य के इतिहास में जाकर देखते हैं तो… READ MORE
जंग हिन्दुस्तानी : जाड़े की सुबह थी। हल्की-हल्की धूप खिली हुई थी। जंगल के बीच मौजूद घास के मैदान में… READ MORE
सुरेश डुडवे: दूर से नारों की आवाज़ आ रही थी। किसानों को नियमानुसार बिजली देनी होगी… देनी होगी…,आदिवासियों के साथ… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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