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पूजा यादव: रक्षा बंधन के बाद हमारे यहाँ एक छोटा-सा मेला लगता है, जिसको पड़इनिया का मेला कहते हैं। यह… READ MORE
संजीव: यह कहानी भोनपुरा पंचायत और उसमें बहने वाली शांत निर्मल नदी के आक्रामक अँधेरी दस्तक की है। ग्वालियर शहर… READ MORE
शिवांशु: मुझे याद है हम शहर में रहते थे और अपने गाँव कभी-कभी जाते थे। फिर एक दिन पापा हम… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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