सूर्यकांत गिरि: तुम तो एक पहेली हो, मैं कैसे तुमको सुलझाऊँ।नीरव रजनी में जगने पर, मैं कैसे मन को बहलाऊँ… READ MORE
संजीव कुमार : कुछ कहानियाँ अधूरी होके भी पूरी हो जाती हैं, तो कुछ कहानीयाँ पूरी होके भी अधूरी रह… READ MORE
ज्योति गोयल: क्या शादी से पहले लड़की और लड़के का रिश्ता रखना और साथ रहना (लिव-इन रिश्ता) गलत है? शादी… READ MORE
वीणा रेहपाडे, नागपूर: लिव्ह इन रिश्ता एक स्त्री व एक पुरुष यांनी विवाह न करता एकत्र राहणे असे सरसकट पणे… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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