उधार करके घी पियो!!

(संप्रभु बॉन्ड की हकीकत) डॉ राहुल बैनर्जी: सभी संप्रभु देशों की सरकारें, देश के विकास के लिए धन जुटाने के लिए, कर या शुल्क लगाती

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आज जिनके हाथों में हल है…

प्रदीप: आज जिनके हाथों में हल है,मत भूलना उन्हीं के हाथों में तुम्हारा कल है।जो अपने हाथों से पूरे देश को खिलाता है,ये उन किसानो

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कृषि अधिनियम: अब खेती भी जाएगी कारोबारियों के हाथों में

एलीन लकड़ा वर्तमान में जिस रफ्तार से सरकारी संस्थान, संसाधन और साधन/सेवाओं का निजीकरण और कोर्पोरेटीकरण हो रहा है, ऐसे लगता है देश के सभी

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