वर्षा बर्मन : कमजोर, अबला, बेसहारा कहकर खुद कोलाचारों-सा बर्ताव नहीं करूंगी आज,नारीत्व की श्रेष्ठता का गान गवा करबेमतलब सम्मान… READ MORE
ओमप्रकाश वाल्मीकि: चूल्हा मिट्टी कामिट्टी तालाब कीतालाब ठाकुर का। भूख रोटी कीरोटी बाजरे कीबाजरा खेत काखेत ठाकुर का। बैल ठाकुर… READ MORE
विनोद: कौन कहता है कि आज़ाद हैं हम, यकीं मानो आज भी गुलाम हैं हम। कभी अंग्रेजों के तो कभी… READ MORE
कमला भसीन: एक पिता अपनी बेटी से कहता है –पढ़ना है! पढ़ना है! तुम्हें क्यों पढ़ना है?पढ़ने को बेटे काफ़ी… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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