नंदिनी : घर से दूर आकर आज़ादी में कैद हो गएमाँ की फिकर, पापा के गुस्से को बंदिश समझते थेबाहर… READ MORE
धनक संस्था द्वारा साझा की गयी – भारती बारहवीं कक्षा में पढ़ने वाली 21 साल की लड़की है जिसे पानीपत… READ MORE
आलोक सोनकर: मैं रात के अंधेरे में जब भी छत की तरफ देखता हूं, तो कुछ अपूर्ण सपने मेरे सामने… READ MORE
जूहेब आज़ाद: मेरे कूड़ेदान में कुछ कागज़ के पन्ने उनमें बसे लफ़्ज़ मेरे तकलीख़* मेरी कुछ दर्द और मेरे सपने… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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