आकाशी पांडे: देखोदो अलग-अलग नदियाँकैसे एक-दूसरे की ओर बढ़ रही हैं।एक अलकनंदा,और दूसरी भागीरथी।।जल का मिलना तो सहज है,पर उनके… READ MORE
शैलेश, रिंपी: कार्य के दौरान लोगों को जानने और समझने की प्रक्रिया में जुड़ते हुए, मैंने जंगी हिंदुस्तानी का नाम… READ MORE
एम.जे. वास्कले: बेशक कम पढ़े लिखे लोगरहते हैं गांव में,फिर भी हर वर्ग के लोगों का मान-सम्मान करना तो रहता… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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