नीतिशा खलखो: दृश्य: एक भगदड़ का वीडियो मुंडी गड़ाए हुए सभी दोस्त देखने में व्यस्त है। संकरी बन्द गलियों में… READ MORE
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नमिता पूनम: पइढ़-लिख के भी जिनगी,ढ़पियाते दिन जाथे!आइज हिञा तो काइल हुवां कर,चक्कर काटते दिन सिराथे।१। गांव- समाज में तो… READ MORE
दीपिका माथुर और तन्नु : बहुत याद आती है, अपने अंदर छुपी उस छोटी-सी बच्ची की,जो शायद अब मर चुकी… READ MORE
नंदिनी : घर से दूर आकर आज़ादी में कैद हो गएमाँ की फिकर, पापा के गुस्से को बंदिश समझते थेबाहर… READ MORE
हरि कुमार कुंजाम: आओ सब मिलकर मनाएंविश्व आदिवासी दिवसउनकी संस्कृति की महकहम सबके जीवन में रस ।। वो जंगलों के… READ MORE
नंदिनी शर्मा : कभी-कभी बातों से लड़-झगड़कर उलझनों में गुम हो जाते हैं….सब की खुशी का ध्यान कर फिर न… READ MORE
नीतिशा खलखो: #1 चलो पितृसत्ता तोड़ें कुमार : ये स्कूल वाले हर दिन क्या ही बच्चों को हु हा सिखाते… READ MORE
नीतिशा खलखो: कुमार : पता है कल यूनिवर्सिटी में फ़िल्म स्क्रीनिंग के दौरान मारपीट हो गई? नितिन : कौनसी फ़िल्म… READ MORE
प्रथ्वीराज सिंह: ” कुछ पल भले हीमृत्यु के होंहोते हैं उत्सव जैसे जैसे रात सोयेखाने के बाद औरसुबह की चाय… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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