श्रुतिका शाह : लहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?मैं पूछता हूँलहू देखा है आपने, महसूस किया है कभी?नब्ज़… READ MORE
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श्रुतिका साह: मैं रचूंगी तुम्हारे लिएइस शताब्दी की सबसे विवादित नज़्म,जिसकी शुरुआती पंक्तियों में ज़िक्र होगाउस दीये काजोमैं तुम्हारे अंतस… READ MORE
श्रुतिका साह: छलांगो और छलांगो…कभी आसमां जकड़ने की कामना से छलांगो,कभी तपते सूरज को लाठी पर से सरकाने की उम्मीद… READ MORE
युवानिया पत्रिका, युवाओं को उनकी सोच को कलमबद्ध करने का एक मंच देने का प्रयास है। इस पत्रिका के माध्यम से हम मुख्यतः युवा मन के विचारों को सामने लाना चाहते हैं। साथ ही आस-पास के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृष्य पर युवाओं के विचारों को भी साझा करना चाहते हैं।
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