शोषण की सत्ता के खिलाफ सतत संघर्षरत कबीर कला मंच

शिवांशु: पिछले दिनों मैं फिल्म देखने के क्रम में था उस दौरान मुझे खोजते हुये एक मराठी फिल्म मिली नाम था “कोर्ट” मैंने वो फिल्म

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बचपन के दिन और गाँव के मेले की खट्टी-मीठी यादें

शिवांशु: मेला, हाट, बाज़ार हमारी संस्कृति का अहम हिस्सा रहे हैं। हम कहीं भी लगने वालों मेलों के ज़रिये वहाँ की संस्कृति, रीति-रिवाज़, सभी चीज़ों

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